इटावा के लिए गौरव का विषय है कि संस्थान की प्रोफेसर एवं फार्माकोग्नोसी विभाग की विभागाध्यक्ष डॉ. श्वेता जैन को वर्ष 2026 के लिए विश्व के शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों में स्थान मिला है। संस्थान की ओर से साझा की गई जानकारी के अनुसार, डॉ. श्वेता जैन का नाम रसायन विज्ञान के क्षेत्र में शामिल किया गया है, जिसमें उनकी विशेषज्ञता औषधीय एवं जैव-अणु रसायन विज्ञान (मेडिसिनल एंड बायोमॉलिक्यूलर केमिस्ट्री) में है। उनकी टॉपएससीआईनेट (TopSCINET) प्रोफाइल पर प्रदर्शित इस उपलब्धि को उनके शैक्षणिक एवं शोध कार्यों के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।
डॉ. श्वेता जैन की इस उपलब्धि से एसएमजीआई परिवार में खुशी का माहौल है। संस्थान ने इसे शोध और वैज्ञानिक गतिविधियों के क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि बताते हुए कहा कि शिक्षकों की ऐसी सफलताएं संस्थान की शैक्षणिक प्रतिष्ठा को मजबूत करती हैं। साथ ही, इससे विद्यार्थियों और शोधार्थियों को विज्ञान, नवाचार तथा उच्चस्तरीय अनुसंधान के क्षेत्र में आगे बढ़ने की प्रेरणा मिलती है। फार्मेसी शिक्षा में गुणवत्तापूर्ण शोध की भूमिका लगातार महत्वपूर्ण होती जा रही है और ऐसे में संकाय सदस्यों की उपलब्धियां संस्थान के लिए विशेष महत्व रखती हैं।
संस्थान की ओर से उपलब्ध कराए गए विवरण के अनुसार, डॉ. श्वेता जैन की वैश्विक रैंक 319,626 तथा संबंधित उपक्षेत्र में वैश्विक रैंक 1,652 बताई गई है। उनकी एच-इंडेक्स रेटिंग 9 और एचएम-इंडेक्स 3 दर्ज है। ये शोध संबंधी मापदंड वैज्ञानिकों के प्रकाशित शोध कार्यों और उनके अकादमिक प्रभाव का आकलन करने में उपयोग किए जाते हैं। हालांकि, अलग-अलग रैंकिंग प्रणालियों में चयन के मानदंड और गणना की पद्धति अलग हो सकती है, इसलिए इन आंकड़ों को संबंधित प्रोफाइल के संदर्भ में देखा जाना चाहिए।
औषधीय एवं जैव-अणु रसायन विज्ञान का क्षेत्र दवाओं, जैविक अणुओं और औषधीय अनुसंधान से जुड़ा हुआ है। फार्मेसी के क्षेत्र में शोध का उद्देश्य औषधीय पदार्थों की प्रकृति, गुणों और संभावित उपयोगों को समझने के साथ-साथ वैज्ञानिक ज्ञान को आगे बढ़ाना होता है। इस क्षेत्र में कार्यरत शिक्षकों और शोधकर्ताओं का योगदान विद्यार्थियों को अनुसंधान की दिशा में प्रेरित करने तथा शैक्षणिक वातावरण को मजबूत बनाने में सहायक होता है।
एसएमजीआई के चेयरमैन डॉ. विवेक यादव ने डॉ. श्वेता जैन को इस उपलब्धि पर बधाई दी और उनके शोध योगदान की सराहना की। उन्होंने कहा कि इस प्रकार की उपलब्धियां संस्थान की शैक्षणिक प्रतिष्ठा को बढ़ाती हैं और शोध एवं नवाचार की संस्कृति को प्रोत्साहित करती हैं। वैज्ञानिक अनुसंधान में निरंतर प्रयास, विषय के प्रति समर्पण और नए ज्ञान की खोज शैक्षणिक संस्थानों को आगे बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। डॉ. श्वेता जैन की उपलब्धि से संस्थान के शिक्षकों और विद्यार्थियों को भी शोध के क्षेत्र में बेहतर प्रदर्शन करने की प्रेरणा मिलेगी।
डॉ. विवेक यादव ने डॉ. जैन के प्रयासों को संस्थान के लिए गौरवपूर्ण बताते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। शिक्षण संस्थानों में शोध को प्रोत्साहन देने के लिए शिक्षकों की उपलब्धियों को पहचानना महत्वपूर्ण होता है, क्योंकि इससे विद्यार्थियों के बीच वैज्ञानिक सोच, नवाचार और अकादमिक उत्कृष्टता के प्रति रुचि विकसित होती है।
एसएमजीआई के निदेशक डॉ. यूएस शर्मा ने भी डॉ. श्वेता जैन को बधाई देते हुए वैज्ञानिक अनुसंधान, नवाचार और निरंतर शैक्षणिक उन्नति के महत्व पर जोर दिया। उन्होंने फार्मास्यूटिकल शिक्षा में शोध गतिविधियों को महत्वपूर्ण बताते हुए कहा कि शैक्षणिक संस्थानों में ज्ञान के विकास और वैज्ञानिक दृष्टिकोण को बढ़ावा देने के लिए निरंतर प्रयास आवश्यक हैं। शोध आधारित शिक्षा विद्यार्थियों को विषय की गहराई समझने, समस्याओं का वैज्ञानिक समाधान तलाशने और भविष्य में अनुसंधान के नए अवसरों की दिशा में आगे बढ़ने में मदद करती है।
डॉ. यूएस शर्मा ने डॉ. जैन की इस उपलब्धि को संस्थान के लिए प्रसन्नता का अवसर बताते हुए उनके आगामी शैक्षणिक एवं शोध कार्यों के लिए शुभकामनाएं दीं। संस्थान के अन्य शिक्षकों ने भी उन्हें बधाई दी और उनके निरंतर सफल शोध प्रयासों की कामना की।
डॉ. श्वेता जैन को वर्ष 2026 के लिए शीर्ष 2 प्रतिशत वैज्ञानिकों में स्थान मिलने की जानकारी से एसएमजीआई में शैक्षणिक उत्कृष्टता और शोध गतिविधियों को लेकर उत्साह बढ़ा है। यह उपलब्धि इस बात को रेखांकित करती है कि उच्च शिक्षा में अध्यापन के साथ-साथ अनुसंधान भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। फार्मेसी जैसे व्यावहारिक और वैज्ञानिक विषय में शोध विद्यार्थियों को नवीनतम ज्ञान से जोड़ने तथा वैज्ञानिक दृष्टिकोण विकसित करने का अवसर प्रदान करता है।
संस्थान के संकाय सदस्यों ने डॉ. श्वेता जैन को इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर हार्दिक शुभकामनाएं देते हुए उनके भविष्य के अकादमिक और शोध कार्यों में निरंतर सफलता की कामना की। एसएमजीआई परिवार ने उनकी उपलब्धि पर गर्व व्यक्त किया और इसे संस्थान के लिए सम्मान का विषय बताया।
