इटावा/सैफई। डेंगू जैसी मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम, समय पर पहचान और आमजन को स्वास्थ्य संबंधी जानकारी उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (यूपीयूएमएस), सैफई के माइक्रोबायोलॉजी विभाग की ओर से सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। पांच अक्टूबर 2026 को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र (सीएचसी) सैफई, इटावा में आयोजित इस सामुदायिक जनजागरूकता गतिविधि के दौरान लोगों को डेंगू के लक्षण, शुरुआती जांच, निशुल्क जांच सुविधाओं और बीमारी से बचाव के उपायों के बारे में जानकारी दी गई। इस पहल का उद्देश्य लोगों को डेंगू के प्रति जागरूक बनाकर बीमारी की समय पर पहचान और रोकथाम को प्रोत्साहित करना रहा।

यह जागरूकता गतिविधि राष्ट्रीय वेक्टर जनित रोग नियंत्रण कार्यक्रम (NVBDCP) की प्रयोगशाला संबंधी गतिविधियों के अंतर्गत आयोजित की गई। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) अजय सिंह के मार्गदर्शन में संचालित इस कार्यक्रम के दौरान स्वास्थ्य टीम ने समुदाय के लोगों को डेंगू से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं के बारे में बताया। लोगों को समझाया गया कि मच्छरों से फैलने वाली बीमारियों की रोकथाम के लिए व्यक्तिगत सावधानी के साथ-साथ घर और आसपास के वातावरण को स्वच्छ रखना भी बेहद जरूरी है।
कार्यक्रम के दौरान डेंगू के प्रमुख लक्षणों के प्रति लोगों को जागरूक किया गया। तेज बुखार, सिरदर्द, शरीर और मांसपेशियों में दर्द, आंखों के पीछे दर्द, मतली तथा त्वचा पर चकत्ते जैसे लक्षण डेंगू संक्रमण में दिखाई दे सकते हैं। हालांकि, केवल लक्षणों के आधार पर डेंगू की पुष्टि नहीं की जा सकती। ऐसे लक्षण दिखाई देने पर चिकित्सकीय सलाह लेना और डॉक्टर के निर्देशानुसार आवश्यक जांच कराना महत्वपूर्ण है। समय पर बीमारी की पहचान होने से मरीज की स्थिति पर निगरानी रखने और आवश्यक उपचार उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है।
स्वास्थ्य टीम ने डेंगू की जांच सुविधाओं के बारे में भी जानकारी दी। लोगों को बताया गया कि बीमारी के लक्षण दिखाई देने पर जांच के लिए स्वास्थ्य केंद्र से संपर्क करना चाहिए और जांच एवं उपचार के संबंध में चिकित्सकीय सलाह का पालन करना चाहिए। कार्यक्रम में निशुल्क जांच सुविधाओं के प्रति जागरूकता बढ़ाने पर विशेष जोर दिया गया, ताकि आर्थिक कारणों अथवा जानकारी के अभाव में लोग स्वास्थ्य सेवाओं से दूर न रहें। समय पर जांच कराने से बीमारी की पहचान और उचित चिकित्सकीय प्रबंधन में सहायता मिलती है।
डेंगू से बचाव के लिए लोगों को अपने घरों और आसपास पानी जमा न होने देने की सलाह दी गई। कूलर, गमलों, टायरों, खुली टंकियों, बर्तनों और अन्य स्थानों पर जमा साफ पानी में डेंगू फैलाने वाले एडीज मच्छर पनप सकते हैं। इसलिए पानी रखने वाले बर्तनों को नियमित रूप से साफ करना, पानी की टंकियों को ढककर रखना और अनुपयोगी वस्तुओं में पानी एकत्रित नहीं होने देना जरूरी है। इसके अतिरिक्त पूरी बांह के कपड़े पहनने, मच्छरदानी या उपयुक्त मच्छररोधी साधनों का इस्तेमाल करने और घर के आसपास सफाई रखने जैसे उपायों को अपनाने की अपील की गई।
जागरूकता कार्यक्रम का उद्देश्य केवल बीमारी के लक्षणों की जानकारी देना ही नहीं, बल्कि लोगों को डेंगू की रोकथाम में सक्रिय भागीदारी के लिए प्रेरित करना भी रहा। स्वास्थ्य संबंधी जागरूकता तभी प्रभावी हो सकती है, जब लोग जानकारी को अपने दैनिक व्यवहार में शामिल करें। घरों में पानी जमा होने से रोकना, आसपास स्वच्छता बनाए रखना और बुखार होने पर लापरवाही न करना ऐसे कदम हैं, जिनसे डेंगू के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
इस गतिविधि को सफल बनाने में डॉ. प्रांशु पांडेय, नोडल अधिकारी एनवीबीडीसीपी (प्रयोगशाला), डॉ. विश्वनाथ सिंह यादव तथा जूनियर रेजिडेंट्स का सहयोग रहा। टीम ने सामुदायिक स्तर पर लोगों को डेंगू की रोकथाम, शुरुआती पहचान और उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं के प्रति जागरूक करने में भागीदारी निभाई। सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर आयोजित इस पहल के माध्यम से लोगों तक स्वास्थ्य संबंधी आवश्यक जानकारी पहुंचाने और बीमारी के प्रति सतर्कता बढ़ाने का प्रयास किया गया।
उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई की ओर से सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत की गई यह पहल जनस्वास्थ्य जागरूकता और निवारक स्वास्थ्य सेवाओं को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण प्रयास है। विश्वविद्यालय का उद्देश्य समुदाय तक स्वास्थ्य संबंधी जानकारी पहुंचाना, लोगों को समय पर जांच कराने के लिए प्रेरित करना और बीमारी से बचाव के प्रति जागरूकता विकसित करना है।
कार्यक्रम के माध्यम से आमजन को संदेश दिया गया कि डेंगू की रोकथाम के लिए सतर्कता, स्वच्छता और समय पर चिकित्सकीय परामर्श जरूरी हैं। बुखार होने पर स्वयं दवा लेने के बजाय डॉक्टर से सलाह लेनी चाहिए। विशेष रूप से डेंगू की आशंका होने पर एस्पिरिन या आइबुप्रोफेन जैसी दवाएं बिना चिकित्सकीय सलाह के नहीं लेनी चाहिए, क्योंकि इनसे रक्तस्राव का जोखिम बढ़ सकता है। लगातार उल्टी, पेट में तेज दर्द, नाक या मसूड़ों से खून आने अथवा अत्यधिक कमजोरी जैसे चेतावनी संकेत दिखाई देने पर तत्काल चिकित्सा सहायता लेनी चाहिए।
यूपीयूएमएस सैफई की इस सामुदायिक पहल ने डेंगू से बचाव के लिए जागरूकता, समय पर पहचान और निवारक स्वास्थ्य उपायों के महत्व को रेखांकित किया। जनभागीदारी और स्वास्थ्य विभाग के सहयोग से ही मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम के प्रयासों को अधिक प्रभावी बनाया जा सकता है।
