वाराणसी। भारत-जापान के ऐतिहासिक एवं मैत्रीपूर्ण संबंधों को समर्पित ‘आबे मेमोरियल कॉरिडोर’ का वाराणसी में उद्घाटन किया गया। जापान के पूर्व प्रधानमंत्री स्वर्गीय शिंजो आबे की धर्मपत्नी अकी आबे की गरिमामयी उपस्थिति में आयोजित कार्यक्रम में भारत-जापान के बीच मजबूत होते सांस्कृतिक एवं कूटनीतिक संबंधों को याद किया गया। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस अवसर को दोनों देशों की मैत्री और साझा सांस्कृतिक विरासत के लिए महत्वपूर्ण बताया।

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कहा कि ‘आबे मेमोरियल कॉरिडोर’ भारत और जापान के ऐतिहासिक, सांस्कृतिक एवं कूटनीतिक संबंधों को मजबूत करने में शिंजो आबे के योगदान का जीवंत प्रतीक है। उन्होंने कहा कि भारत और जापान के बीच संबंध केवल कूटनीतिक स्तर तक सीमित नहीं हैं, बल्कि दोनों देशों के बीच प्राचीन सांस्कृतिक एवं आध्यात्मिक जुड़ाव भी रहा है। वाराणसी जैसे आध्यात्मिक शहर में शिंजो आबे की स्मृति को समर्पित स्थल इस मैत्री को और गहरा करने का कार्य करेगा।
कार्यक्रम में शिंजो आबे के भारत के साथ संबंधों और दोनों देशों के बीच सहयोग को बढ़ाने में उनकी भूमिका को विशेष रूप से याद किया गया। जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे भारत-जापान संबंधों को नई ऊंचाई देने वाले प्रमुख वैश्विक नेताओं में रहे। उनके कार्यकाल के दौरान दोनों देशों के बीच रणनीतिक, आर्थिक, सांस्कृतिक और जनसंपर्क संबंधों को मजबूती मिली।
आबे मेमोरियल कॉरिडोर को भारत-जापान मैत्री की स्मृति को स्थायी रूप से संरक्षित करने वाली पहल के रूप में देखा जा रहा है। वाराणसी में इसकी स्थापना दोनों देशों के सांस्कृतिक संबंधों के महत्व को भी रेखांकित करती है। काशी लंबे समय से आध्यात्मिक और सांस्कृतिक गतिविधियों का प्रमुख केंद्र रही है और जापान के साथ इसके विशेष सांस्कृतिक संबंध भी रहे हैं।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने जापान के पूर्व प्रधानमंत्री शिंजो आबे को श्रद्धांजलि अर्पित करते हुए कहा कि भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और देश के 140 करोड़ नागरिकों की ओर से उन्हें विनम्र श्रद्धांजलि है। उन्होंने कहा कि भारत-जापान संबंधों को मजबूत बनाने के लिए शिंजो आबे द्वारा किए गए प्रयासों को सदैव याद किया जाएगा।
‘आबे मेमोरियल कॉरिडोर’ का उद्घाटन दोनों देशों की दोस्ती, आपसी विश्वास और सांस्कृतिक साझेदारी के संदेश के रूप में सामने आया है। यह स्मृति-स्थल आने वाली पीढ़ियों को भारत-जापान के मजबूत होते संबंधों तथा शिंजो आबे के योगदान से परिचित कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
