ऊसराहार में दस लाख की चोरी की सूचना से मचा हड़कंप, जांच में फर्जी निकली कहानी

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ऊसराहार। थाना क्षेत्र के पुरैला गांव में मंगलवार को दस लाख रुपये चोरी होने की सूचना मिलने से पुलिस महकमे में हड़कंप मच गया। सूचना मिलते ही थाना पुलिस से लेकर क्षेत्राधिकारी और अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण तक मौके पर पहुंच गए। करीब पांच घंटे तक चली जांच और पूछताछ के बाद पुलिस ने मामले का खुलासा करते हुए बताया कि दस लाख रुपये की चोरी की घटना फर्जी थी। पुलिस के अनुसार, रुपये गायब होने के पीछे पारिवारिक कारणों से चोरी की कहानी गढ़ी गई थी। अब पुलिस झूठी रिपोर्ट दर्ज कराने के मामले में कार्रवाई की तैयारी कर रही है।

पुरैला निवासी कामता प्रसाद यादव ने मंगलवार को ऊसराहार पुलिस को सूचना दी कि उसके घर से दस लाख रुपये और चांदी की एक पायल चोरी हो गई है। सूचना मिलते ही पुलिस सक्रिय हो गई। थानाध्यक्ष नरेंद्र कुमार मिश्रा पुलिस टीम के साथ मौके पर पहुंचे। कुछ ही देर में क्षेत्राधिकारी रामदवन मौर्य भी घटनास्थल पर पहुंच गए। पुलिस ने वादी कामता प्रसाद और उसके पुत्र अमित से अलग-अलग पूछताछ शुरू की। पूछताछ के दौरान दोनों के बयानों में विरोधाभास सामने आने पर पुलिस को घटना को लेकर संदेह हुआ।

पुलिस के अनुसार, कामता प्रसाद की जमीन एक्सप्रेसवे निर्माण की जद में आई थी, जिसके एवज में उसे मुआवजा मिला था। इसी धनराशि में से उसने हाल ही में बैंक से 18 लाख रुपये निकाले थे। मामला गंभीर होने के कारण अपर पुलिस अधीक्षक ग्रामीण श्रीश चंद्र, फील्ड यूनिट और एसओजी टीम भी मौके पर पहुंच गई। अधिकारियों ने परिवार के सदस्यों से अलग-अलग पूछताछ कर घटना से जुड़े तथ्यों की जानकारी जुटाई।

करीब पांच घंटे तक चली जांच के दौरान पुलिस ने बैंक से निकाली गई रकम और हाल में किए गए लेनदेन की जानकारी खंगाली। पूछताछ में सामने आया कि कामता प्रसाद ने अपने पुत्र अमित की पत्नी के नाम दो दिन पहले आठ लाख रुपये में एक प्लाट का बैनामा कराया था। इसके बाद शेष रकम के संबंध में स्पष्ट जानकारी नहीं मिल रही थी। पुलिस को यह भी पता चला कि कामता प्रसाद ने अपनी बेटी मीना, जो करहल थाना क्षेत्र के मंसीरपुर निवासी संतोष की पत्नी है, को भी आठ लाख रुपये देकर प्लाट खरीदने के लिए रकम दी थी।

थानाध्यक्ष नरेंद्र कुमार मिश्रा के अनुसार, बेटी को रुपये देने की बात कामता प्रसाद ने परिवार के अन्य सदस्यों से छिपाई थी। उसे आशंका थी कि यदि यह जानकारी परिवार में सामने आई तो बहू से विवाद हो सकता है। इसी कारण उसने रुपये चोरी होने की कहानी गढ़ दी। पुलिस के अनुसार, पूछताछ के दौरान पिता-पुत्र के बयानों में अंतर सामने आने के बाद दोनों को आमने-सामने बैठाकर पूछताछ की गई, जिसके बाद कथित चोरी की पूरी कहानी सामने आ गई।

पुलिस ने इस बात को भी जांच का अहम बिंदु माना कि कामता प्रसाद का मकान गांव में भी है, इसके बावजूद उसने गांव से बाहर स्थित एक छोटे मकान में इतनी बड़ी रकम रखे जाने की बात बताई थी। पुलिस को यह बात संदिग्ध लगी और इसी आधार पर जांच को आगे बढ़ाया गया। गहन पूछताछ और उपलब्ध तथ्यों की जांच के बाद पुलिस ने दस लाख रुपये की चोरी की घटना को फर्जी पाया।

थानाध्यक्ष नरेंद्र कुमार मिश्रा ने बताया कि कामता प्रसाद ने हाल में बैंक से 18 लाख रुपये निकाले थे। पुलिस की जांच में सामने आया कि रकम का एक हिस्सा जमीन के लेनदेन में दिया गया था और चोरी की सूचना गलत तरीके से दी गई। उन्होंने बताया कि फर्जी चोरी की रिपोर्ट दर्ज कराने के मामले में नियमानुसार कार्रवाई की तैयारी की जा रही है।

क्षेत्राधिकारी रामदवन मौर्य ने बताया कि दस लाख रुपये चोरी होने की सूचना मिलने के कारण पुलिस ने मामले की गंभीरता से जांच की। पूछताछ और जांच के बाद पूरी घटना फर्जी पाई गई। अधिकारियों के निर्देश पर अब पुलिस फर्जी सूचना और रिपोर्ट दर्ज कराने के संबंध में आगे की कार्रवाई करेगी।

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