साबरमती में रेलवे की नई परियोजनाओं का शुभारंभ, रेल सुरक्षा और परिचालन क्षमता को मिलेगा बढ़ावा

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अहमदाबाद। केंद्रीय गृह एवं सहकारिता मंत्री अमित शाह ने रविवार को साबरमती रेलवे स्टेशन पर रेलवे से जुड़ी विभिन्न परियोजनाओं का शुभारंभ और शिलान्यास किया। इस दौरान WAG-12 लोकोमोटिव मेंटेनेंस शेड का उद्घाटन, साबरमती-कलोल और साबरमती-साणंद रेलखंड पर स्वचालित सिग्नलिंग प्रणाली का लोकार्पण तथा रेल मार्ग के दोहरीकरण और कवच प्रणाली से संबंधित परियोजनाओं का शिलान्यास किया गया। इन परियोजनाओं का उद्देश्य रेल परिचालन को अधिक सुरक्षित, सुगम और प्रभावी बनाना है।

कार्यक्रम के दौरान अमित शाह ने कहा कि भारतीय रेल नेटवर्क के विस्तार और आधुनिकीकरण के साथ रेलवे आत्मनिर्भरता की दिशा में भी आगे बढ़ रहा है। आधुनिक तकनीक और नई आधारभूत संरचनाओं के माध्यम से रेल परिचालन की क्षमता बढ़ाने के साथ यात्रियों और माल परिवहन की सुविधाओं को बेहतर बनाने पर जोर दिया जा रहा है।

साबरमती में स्थापित WAG-12 लोकोमोटिव मेंटेनेंस शेड मालगाड़ियों के संचालन में उपयोग होने वाले उच्च क्षमता वाले इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव के रखरखाव में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा। इससे लोकोमोटिव के रखरखाव की प्रक्रिया को व्यवस्थित करने और उनकी उपलब्धता बेहतर बनाने में मदद मिलने की उम्मीद है। कार्यक्रम के दौरान हाई-कैपेसिटी WAG-12 इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव को भी हरी झंडी दिखाई गई।

साबरमती-कलोल और साबरमती-साणंद रेलखंड पर स्वचालित सिग्नलिंग प्रणाली शुरू किए जाने से रेल परिचालन को तकनीकी रूप से अधिक सक्षम बनाने में मदद मिलेगी। आधुनिक सिग्नलिंग व्यवस्था रेल यातायात के बेहतर प्रबंधन और ट्रेनों के संचालन में दक्षता बढ़ाने में उपयोगी होती है। भारतीय रेल लगातार इलेक्ट्रॉनिक इंटरलॉकिंग, स्वचालित सिग्नलिंग और अन्य आधुनिक प्रणालियों के विस्तार पर काम कर रही है।

कार्यक्रम में रेल मार्ग के दोहरीकरण तथा कवच प्रणाली से जुड़ी परियोजनाओं का शिलान्यास भी किया गया। रेल मार्ग के दोहरीकरण से ट्रेनों के संचालन की क्षमता बढ़ाने और माल एवं यात्री ट्रेनों की आवाजाही को अधिक सुगम बनाने में मदद मिल सकती है। वहीं कवच भारतीय रेल द्वारा विकसित स्वदेशी ऑटोमैटिक ट्रेन प्रोटेक्शन सिस्टम है, जो निर्धारित गति सीमा के पालन में लोको पायलट की सहायता करता है और आवश्यकता पड़ने पर स्वचालित रूप से ब्रेक लगाने में सक्षम है।

कवच प्रणाली का उद्देश्य सिग्नल पासिंग एट डेंजर (SPAD) जैसी स्थितियों को रोकने, ट्रेन की गति को नियंत्रित करने और टक्कर के जोखिम को कम करने में सहायता करना है। कवच 4.0 में ट्रेन की लोकेशन की अधिक सटीक जानकारी, बड़े यार्ड में सिग्नल संबंधी बेहतर सूचना तथा ऑप्टिकल फाइबर के माध्यम से स्टेशन-टू-स्टेशन इंटरफेस जैसी तकनीकी सुविधाएं शामिल हैं।

भारतीय रेल के अनुसार जुलाई 2026 के अंत तक कवच 4.0 को 2,633 रूट किलोमीटर पर सफलतापूर्वक कमीशन किया जा चुका था, जबकि देश के विभिन्न हिस्सों में इसके विस्तार का कार्य जारी है। रेलवे के आधुनिकीकरण कार्यक्रम में ट्रैक, सिग्नलिंग, विद्युत व्यवस्था, लोकोमोटिव और सुरक्षा तकनीक को एक साथ मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।

रेलवे परियोजनाओं के विस्तार से संबंधित क्षेत्रों में माल परिवहन की क्षमता बढ़ने, रेल परिचालन को अधिक व्यवस्थित बनाने और बुनियादी ढांचे से जुड़े रोजगार के अवसरों में वृद्धि की संभावना है। विशेष रूप से उच्च क्षमता वाले मालवाहक लोकोमोटिव और आधुनिक सिग्नलिंग व्यवस्था मालगाड़ियों की आवाजाही को अधिक प्रभावी बनाने में सहायक हो सकती है।

कार्यक्रम में रेलवे से जुड़े अधिकारियों एवं अन्य गणमान्य लोगों की उपस्थिति रही। परियोजनाओं के शुभारंभ और शिलान्यास के साथ रेलवे के आधुनिकीकरण, सुरक्षा तकनीक के विस्तार और परिचालन क्षमता बढ़ाने की दिशा में गुजरात के रेल नेटवर्क में नई सुविधाओं को जोड़ा गया।

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