इटावा। रबी फसली वर्ष 2026-27 के तहत जनपद में प्रस्तावित नहरों की सिल्ट सफाई कार्यों को लेकर जिलाधिकारी शुभ्रांत कुमार शुक्ल ने अधिकारियों को सख्त निर्देश दिए हैं। कलेक्ट्रेट सभागार में आयोजित समीक्षा बैठक में उन्होंने स्पष्ट कहा कि सिल्ट सफाई का कार्य केवल कागजी औपचारिकता तक सीमित न रहे, बल्कि गुणवत्ता और तकनीकी मानकों का पूरी तरह पालन सुनिश्चित किया जाए।

बैठक में जनपद की नहरों की स्थिति और प्रस्तावित सफाई कार्यों की समीक्षा की गई। अधिकारियों ने बताया कि इटावा प्रखंड के अंतर्गत निचली गंगा नहर की 65 शाखाएं, भोगनीपुर प्रखंड के अंतर्गत 41 शाखाएं तथा सिंचाई खंड औरैया-दिबियापुर के अंतर्गत 3 नहरें हैं। जनपद में कुल 109 नहरों की लंबाई 704.529 किलोमीटर है, जिनमें सिल्ट सफाई का कार्य प्रस्तावित है।
जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि सफाई कार्य के दौरान नहरों का निर्धारित लेवल किसी भी स्थिति में प्रभावित नहीं होना चाहिए। संबंधित अधिकारी स्थल पर मौजूद रहकर कार्य की गुणवत्ता और प्रगति की नियमित निगरानी करें। उन्होंने कहा कि नहरों में जल प्रवाह बाधित न हो तथा तकनीकी मानकों के अनुरूप कार्य कराया जाए, ताकि नहरों के अंतिम छोर तक किसानों को पर्याप्त सिंचाई जल उपलब्ध हो सके।
उन्होंने यह भी निर्देश दिए कि कार्यदायी संस्थाओं एवं ठेकेदारों का चयन पूरी पारदर्शिता के साथ किया जाए। जिन एजेंसियों का पूर्व प्रदर्शन संतोषजनक नहीं रहा है, उन्हें टेंडर प्रक्रिया में प्राथमिकता न दी जाए। डीएम ने कहा कि गुणवत्ता की पुष्टि होने के बाद ही कार्यों का सत्यापन किया जाए और किसी भी स्तर पर मानकों से समझौता न किया जाए।
बैठक में नहरों से निकलने वाली मिट्टी एवं सिल्ट के निस्तारण पर भी चर्चा हुई। जिलाधिकारी ने निर्देश दिए कि निकाली गई मिट्टी का उचित आकलन कर नियमानुसार उसकी नीलामी की कार्रवाई की जाए। साथ ही कार्य प्रारंभ होने से पूर्व नहरों का स्थलीय निरीक्षण कर प्राथमिकता तय की जाए तथा पूरे अभियान के दौरान तकनीकी मानकों, जल प्रवाह और सिंचाई व्यवस्था पर लगातार निगरानी रखी जाए।
बैठक में आईएएस कोमल पुनिया सहित संबंधित विभागों और सिंचाई विभाग के अधिकारी उपस्थित रहे।
