बकेवर:- नवादा खुर्दकला गांव के हनुमान मंदिर में चल रहे रासलीला महोत्सव में सोमवार शाम रुक्मिणी विवाह लीला का मंचन किया गया। यमुना नदी के किनारे स्थित इस मंदिर में वृन्दावन से आए कलाकारों ने प्रस्तुति दी, जिसे देखने के लिए आसपास के गांवों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु पहुंचे। वृन्दावन के कलाकारों ने रासलीला को जीव और ईश्वर का पवित्र मिलन बताया। उन्होंने दर्शकों को समझाया कि भगवान कृष्ण ने यमुना तट पर योग माया के माध्यम से असंख्य गोपियों के साथ महारास किया था। इन गोपियों में साधन सिद्धा, योग सिद्धा, वरदान सिद्धा, नृचा रूपा और ऋषि रूपा शामिल थीं।
कलाकारों ने कृष्ण-रुक्मिणी विवाह प्रसंग का भी वर्णन किया। उन्होंने बताया कि रुक्मिणी देवी लक्ष्मी का और भगवान कृष्ण नारायण का स्वरूप हैं। उन्होंने भगवान कृष्ण के 16,108 विवाहों का आध्यात्मिक महत्व समझाते हुए कहा कि आठ प्रकार की प्रकृति को अष्ट पटरानी, वेद के सोलह हजार मंत्रों को सोलह हजार पत्नियों और सौ उपनिषदों को सौ रानियों के रूप में वर्णित किया गया है। कलाकारों के अनुसार, महारास लीला के दर्शन से हृदय से काम वासना नष्ट होती है।
महोत्सव के दौरान व्यास पीठ का पूजन भी संपन्न हुआ। इस रासलीला में दिनेश शर्मा व्यास, अरुण शर्मा, राजवीर शर्मा, दीवान शर्मा, पवन शर्मा, कन्नू शर्मा, बागेश शर्मा और लालाराम शर्मा सहित कई गणमान्य व्यक्ति तथा ग्रामीण क्षेत्र के श्रद्धालु उपस्थित रहे। इस आयोजन को सफल बनाने में प्रबंधक शिवरतन (लला), मायादेवी गुरुसनेही राठौर, सुरेंद्र राठौर, विनोद कुमार और कुंडेश्वर बाले महंत ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
