भरथना (रिपोर्ट- तनुज श्रीवास्तव, 9720063658)- मानवीय दृष्टिकोंण के चलते पारिवारिक सदस्यों के मृतक पुत्र के अंगदान करने वाले अत्यन्त साहसिक निर्णय ने मानवता की एक ऐसी मसाल पेश की, जिससे उनके बेटे ने मरते-मरते दो लोगों को जीवनदान दे दिया।
कस्बा के मुहल्ला सिन्धी कालोनी निवासी व्यापारी लक्ष्मण दास गनवानी के पुत्र सुनील गनवानी का बीती 23 मार्च को रायपुर (छत्तीसगढ़) में एक सड़क दुर्घटना में गम्भीर घायल हो जाने पर कई दिनों से चल रहे इलाज के दौरान उनकी मौत हो गई। पुत्र की मौत की खबर से परिवार में चीख पुकार के बीच कोहराम मच गया। इसी बीच मृतक सुनील के परिजनों ने ऐसी दुख की घडी में मानवता से परिपूर्ण एक बेहद ही साहसिक निर्णय लिया। परिजनों ने मौजूद चिकित्सकों के परामर्श के बाद अपने पुत्र के अंगदान की सहमति दी। उन्होंने अपने मृतक बेटे की दोनों किडनी दान करके दो लोगों को जीवनदान देने का काम किया। इस साहसिक कदम से 24 वर्षीय एक युवक व 35 वर्षीय एक महिला जो बीते करीब दो वर्षों से डायलिसिस पर थीं, को नई जिन्दगी मिल गयी। अश्रुपूरित नयनों के बीच परिवार ने सुनील को वेंटिलेटर से हटाने की अनुमति दी। उनकी दोनों किडनी जरूरतमंद मरीजों को प्रत्यारोपित की गईं। एम्स छत्तीसगढ़ के वरिष्ठ डाक्टरों की टीम ने सुनील गनवानी को पूरे सम्मान के साथ अंतिम विदाई दी। इतना ही नहीं, डाक्टरों की टीम स्वयं उनके पार्थिव शरीर को अस्पताल से उनके घर तक छोड़ने भी आई। सुनील गनवानी का यह त्याग और उनके परिवार का यह निर्णय हमेशा मानवता के लिए प्रेरणा बना रहेगा।
