नई दिल्ली। भारी उद्योग मंत्रालय ने देश में उन्नत विनिर्माण को बढ़ावा देने की दिशा में एक बड़ा कदम उठाते हुए सिंटर्ड रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट (आरईपीएम) के निर्माण हेतु 6,000 मीट्रिक टन प्रति वर्ष (एमटीपीए) क्षमता वाले एकीकृत संयंत्र की स्थापना के लिए प्रस्ताव के लिए अनुरोध (आरएफपी) जारी किया है।
इस निविदा प्रक्रिया के माध्यम से इच्छुक कंपनियां देश में एकीकृत सिंटर्ड एनडीएफईबी (NdFeB) रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट निर्माण संयंत्र स्थापित करने के लिए अपनी बोलियां प्रस्तुत कर सकेंगी। चयनित लाभार्थियों को योजना के तहत पूंजीगत सब्सिडी और बिक्री-संबंधी प्रोत्साहनों का लाभ मिलेगा। पूरी प्रक्रिया केंद्रीय सार्वजनिक खरीद पोर्टल के माध्यम से दो चरणों—तकनीकी और वित्तीय बोली—में पारदर्शी न्यूनतम लागत प्रणाली (एलसीएस) के तहत ऑनलाइन आयोजित की जाएगी।
मंत्रालय के अनुसार, निविदा दस्तावेज 20 मार्च, 2026 से उपलब्ध हैं। बोली-पूर्व सम्मेलन 7 अप्रैल, 2026 को आयोजित होगा, जबकि बोली जमा करने की अंतिम तिथि 28 मई, 2026 निर्धारित की गई है। तकनीकी बोलियां 29 मई, 2026 को खोली जाएंगी।
इस योजना को 26 नवंबर 2025 को नरेन्द्र मोदी की अध्यक्षता में केंद्रीय मंत्रिमंडल ने मंजूरी दी थी। कुल 7,280 करोड़ रुपये के वित्तीय परिव्यय वाली इस योजना का उद्देश्य भारत में रेयर अर्थ परमानेंट मैग्नेट के घरेलू उत्पादन को बढ़ाना और देश को इस क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाना है।
योजना के तहत प्रत्येक लाभार्थी को 600 से 1,200 एमटीपीए तक की उत्पादन क्षमता (100 एमटीपीए के गुणकों में) आवंटित की जाएगी। इसमें 750 करोड़ रुपये की पूंजीगत सब्सिडी और 6,450 करोड़ रुपये का बिक्री-आधारित प्रोत्साहन शामिल है। साथ ही, तीन सबसे कम बोली लगाने वाले प्रतिभागियों को आईआरईएल (इंडिया) लिमिटेड से एनडीपीआर ऑक्साइड की सीमित आपूर्ति भी उपलब्ध कराई जाएगी।
दुर्लभ पृथ्वी स्थायी चुंबक दुनिया के सबसे शक्तिशाली चुंबकों में शामिल हैं और इनका उपयोग इलेक्ट्रिक वाहनों, पवन टर्बाइनों, आधुनिक इलेक्ट्रॉनिक्स, एयरोस्पेस और रक्षा क्षेत्रों में व्यापक रूप से होता है। सरकार की यह पहल एनडीपीआर ऑक्साइड से लेकर तैयार चुंबकों तक की पूरी मूल्य श्रृंखला देश में विकसित करने की दिशा में अहम मानी जा रही है, जिससे आयात पर निर्भरता कम होगी और भारत वैश्विक बाजार में अपनी मजबूत पहचान बना सकेगा।
