नई दिल्ली। केंद्रीय मत्स्य पालन, पशुपालन और डेयरी मंत्री राजीव रंजन सिंह (ललन सिंह) ने राज्यसभा में एक प्रश्न के उत्तर में बताया कि मत्स्य विभाग ने पिछले पांच वर्षों (2020-21 से 2024-25) के दौरान हरियाणा सरकार के 760.87 करोड़ रुपये के मत्स्य विकास योजना प्रस्तावों को मंजूरी दी है। इसमें केंद्र सरकार की हिस्सेदारी 262.16 करोड़ रुपये है।
मंत्री ने बताया कि ये सभी प्रस्ताव प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (पीएमएमएसवाई) के अंतर्गत स्वीकृत किए गए हैं, जिनका उद्देश्य राज्य में मत्स्य पालन अवसंरचना और जलीय कृषि का विकास करना है। केंद्र सरकार द्वारा अपने हिस्से की 168.61 करोड़ रुपये की राशि हरियाणा सरकार को जारी भी की जा चुकी है।
पीएमएमएसवाई के तहत हरियाणा में कई महत्वपूर्ण पहलें की गई हैं। इनमें खारे एवं क्षारीय क्षेत्रों सहित 3766 हेक्टेयर में नए मत्स्य पालन तालाबों का निर्माण, 166 मछली कियोस्क, 130 पुनर्चक्रण मत्स्य पालन प्रणाली, 326 बायोफ्लॉक इकाइयां, 11 नई मीठे पानी की मछली हैचरी, 48 मछली चारा मिलें, 23 आइस प्लांट/कोल्ड स्टोरेज, एक एकीकृत एक्वा पार्क तथा 9 सजावटी मछली पालन इकाइयों की स्थापना शामिल है।
हरियाणा सरकार के मत्स्य विभाग के अनुसार, हिसार और करनाल जिलों में मछली पालकों को क्रमशः 514.51 लाख रुपये और 1151.95 लाख रुपये की सहायता प्रदान की गई है।
मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के प्रभावी क्रियान्वयन से राज्य में मत्स्य पालन गतिविधियों को बढ़ावा मिला है, जिससे ‘नीली क्रांति’ को गति मिली है। इस पहल के जरिए मत्स्य पालन को आजीविका के एक सशक्त स्रोत के रूप में अपनाने से विशेष रूप से महिलाओं और अनुसूचित जाति समुदाय के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित हुए हैं। इसके परिणामस्वरूप राज्य में मछली पालकों की आय में उल्लेखनीय वृद्धि दर्ज की गई है।
