इटावा उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष एवं सामाजिक कार्यकर्ता अनन्त अग्रवाल ने विद्युत विभाग के अधीक्षण अभियंता का ध्यान जनपद के बिजली उपभोक्ताओं की समस्याओं की ओर आकर्षित कराया है। उन्होंने आरोप लगाया कि विभाग द्वारा पारंपरिक इलेक्ट्रॉनिक मीटरों की जगह स्मार्ट मीटर बिना उपभोक्ताओं की सहमति और पूर्ण जानकारी दिए जबरन लगाए जा रहे हैं।
अनन्त अग्रवाल ने कहा कि विभाग अब तक लगाए गए स्मार्ट मीटरों को पूरी तरह से फीड करने में सफल नहीं हो पाया है। लगभग 50 प्रतिशत से अधिक स्मार्ट मीटर लगने के बावजूद उपभोक्ताओं को उनके बिजली उपभोग और बिल की जानकारी संबंधी संदेश प्राप्त नहीं हो रहे हैं, जिससे उन्हें वास्तविक खपत और भुगतान की स्थिति का पता नहीं चल पा रहा है।
उन्होंने यह भी बताया कि बिना पूर्व सूचना के कई उपभोक्ताओं की बिजली सप्लाई काट दी जा रही है। उपभोक्ता भुगतान करने के बाद भी कनेक्शन बहाल नहीं किया जा रहा है। कई मामलों में उपभोक्ताओं को यह तक जानकारी नहीं होती कि उन्हें कितना बकाया जमा करना है। शिकायतें यह भी सामने आई हैं कि मात्र 500 रुपये के बकाये पर भी बिजली आपूर्ति बाधित कर दी जा रही है।
व्यापार मंडल अध्यक्ष ने कहा कि आज भी लगभग 30 प्रतिशत लोग साधारण मोबाइल फोन का उपयोग करते हैं, जबकि करीब 30 प्रतिशत उपभोक्ता एंड्रॉयड फोन का सही ढंग से संचालन नहीं कर पाते और 30 प्रतिशत लोग इंटरनेट सेवाओं का उपयोग नहीं करते। ऐसे में स्मार्ट मीटर प्रणाली उनके लिए परेशानी का कारण बन रही है।
उन्होंने यह भी बताया कि विभाग द्वारा स्मार्ट मीटर लगाते समय कहा गया था कि ये मीटर फिलहाल प्रीपेड नहीं होंगे, लेकिन वर्तमान व्यवस्था से उपभोक्ताओं को असुविधा हो रही है। ग्रामीण एवं कस्बाई क्षेत्रों के करीब 40 प्रतिशत उपभोक्ता नियमित रूप से हर माह बिल जमा नहीं कर पाते और अपनी सुविधा अनुसार किस्तों में भुगतान करते हैं, जबकि विभाग बकाये पर हर माह दो प्रतिशत ब्याज भी वसूलता है।
अनन्त अग्रवाल ने अधीक्षण अभियंता से मांग की है कि स्मार्ट मीटर प्रणाली को उपभोक्ताओं के अनुकूल बनाया जाए, उन्हें मोबाइल पर समय पर सही जानकारी उपलब्ध कराई जाए तथा छोटे बकाये पर बिजली कनेक्शन काटने की कार्रवाई न की जाए। उन्होंने उपभोक्ताओं की समस्याओं के त्वरित समाधान की भी मांग की है।
