शहर के समारोह स्थल पर किराना समिति के तत्वावधान में शहर के प्रमुख खाद्य कारोबारियों और फूड विभाग के अधिकारियों के बीच एक महत्वपूर्ण बैठक का आयोजन किया गया। बैठक का शुभारंभ असिस्टेंट फूड कमिश्नर राजेश द्विवेदी एवं उनके साथ आए अधिकारियों के स्वागत से हुआ। समिति के अध्यक्ष त्रिलोकी नाथ केसरवानी ने माल्यार्पण कर उनका अभिनंदन किया।
बैठक में उद्योग व्यापार प्रतिनिधि मंडल के जिलाध्यक्ष आलोक दीक्षित ने व्यापारियों की ओर से अपनी समस्याएँ रखते हुए कहा कि टारगेट के नाम पर की जा रही अनावश्यक सैंपलिंग पर रोक लगाई जानी चाहिए। उन्होंने कहा कि खेती में अंधाधुंध रासायनिक खाद व कीटनाशकों के उपयोग और भूगर्भीय जल में भारी केमिकल असंतुलन के कारण खाद्य उपज में स्वाभाविक रूप से रासायनिक अनियमितताएँ होती हैं। ऐसे में खाद्य पदार्थ बनाने वाले व्यापारी को दोषी ठहराना अनुचित है।
उन्होंने यह भी कहा कि जब मल्टीनेशनल कंपनियों और कॉरपोरेट घरानों के सीलबंद उत्पाद फेल होते हैं, तो कार्रवाई उन्हीं पर होनी चाहिए, न कि रिटेल दुकानदारों पर। बिना अपराध किए रिटेल व्यापारियों को दंडित करना पूरी तरह गलत है।
फूड सेफ्टी अधिकारी ने व्यापारियों को स्पष्ट किया कि रिटेल व्यापारी जिस भी सामान की खरीद करें, उसका बिल अवश्य लें। बिना बिल के सामान लेने पर वे अपराधी की श्रेणी में आ जाते हैं। उन्होंने यह भी बताया कि एक प्रतिष्ठान से साल में केवल एक बार सैंपल लिया जाता है, परंतु स्टाफ की कमी के कारण टारगेट पूरा नहीं हो पाता। साथ ही उन्होंने मिठाई निर्माताओं से अपील की कि वे मिठाई में कृत्रिम रंगों का प्रयोग न करें, क्योंकि ज्यादातर सैंपल रंग की वजह से ही फेल होते हैं।
कार्यक्रम का संचालन घनश्याम बाजपेई ने किया। इस अवसर पर उद्योग मंच अध्यक्ष भारतेन्द्र नाथ भारद्वाज, व्यापार मंडल के कोषाध्यक्ष कामिल कुरैशी, हाजी शंहशाह वारसी, नबाब भाई, अगम परिहार, यदुवीर सिंह यादव, रिंकू यादव समेत सैकड़ों व्यापारी मौजूद रहे।
