विश्व वन्यजीव दिवस: प्रकृति की अमूल्य धरोहर के संरक्षण की जरूरत

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दुनियाभर में 3 मार्च को विश्व वन्यजीव दिवस (World Wildlife Day) मनाया जाता है ताकि लोगों को वन्यजीवों और उनके संरक्षण के प्रति जागरूक किया जा सके। यह दिन हमें यह याद दिलाता है कि यह धरती केवल मनुष्यों की नहीं बल्कि यहां पाए जाने वाले सभी जीव-जंतुओं की भी है। वन्यजीव हमारे पारिस्थितिकी तंत्र का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं और उनके बिना न केवल प्रकृति अधूरी होगी, बल्कि मानव जीवन भी प्रभावित होगा। लेकिन दुर्भाग्यवश, स्वार्थी कारणों से मनुष्य लगातार वन्यजीवों के प्राकृतिक आवासों को नष्ट कर रहा है, जिससे जैव विविधता खतरे में पड़ रही है। यदि इस ओर ध्यान नहीं दिया गया, तो भविष्य में यह एक गंभीर पर्यावरणीय संकट बन सकता है।

जनपद इटावा में वन्यजीव संरक्षण के लिए कार्य कर रही संस्था ऑर्गनाइजेशन फॉर कंजर्वेशन ऑफ एनवायरनमेंट एंड नेचर (ओशन) के महासचिव और सर्पमित्र डॉ. आशीष त्रिपाठी ने सभी जनपदवासियों से अपील की है कि यदि उन्हें कोई भी वन्यजीव कहीं भी दिखे, तो तुरंत डायल 112 या वन विभाग को सूचित करें। अगर कोई अन्य संपर्क उपलब्ध न हो, तो वे हेल्पलाइन नंबर 7017204213 पर भी सूचना दे सकते हैं।

डॉ. आशीष त्रिपाठी, जो नगर पालिका परिषद इटावा के स्वच्छता, पर्यावरण एवं वन्यजीव संरक्षण के ब्रांड एम्बेसडर भी हैं, ने बताया कि भारतीय वन्यजीव संरक्षण अधिनियम 1972 के तहत जनपद इटावा में पाए जाने वाले सभी वन्यजीवों को विशेष सुरक्षा प्राप्त है। इनमें सांप, कछुए, सारस, घड़ियाल, मगरमच्छ, डॉल्फिन और तेंदुआ सहित अन्य वन्यजीव शामिल हैं। इस कानून के तहत वन्यजीवों को मारना दंडनीय अपराध है और इसके लिए सजा तथा जुर्माने का प्रावधान किया गया है।

वन्यजीवों के महत्व को समझाने के लिए डॉ. आशीष त्रिपाठी द्वारा विभिन्न विद्यालयों और महाविद्यालयों में जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किए जा रहे हैं। इन कार्यक्रमों के माध्यम से सैकड़ों छात्र-छात्राओं को वन्यजीव संरक्षण के महत्व और उनकी पारिस्थितिकी में भूमिका के बारे में शिक्षित किया जा रहा है। उन्होंने विशेष रूप से सर्पों की उपयोगिता और सर्पदंश के उपचार को लेकर जागरूकता बढ़ाने पर जोर दिया।

डॉ. आशीष ने बताया कि होली के बाद सांपों के हाइबरनेशन से बाहर आने का समय होता है, जिससे वे भोजन की तलाश में घरों, स्कूलों और कार्यालयों के पास आ सकते हैं। ऐसे में सभी को सतर्क रहने और साफ-सफाई पर विशेष ध्यान देने की जरूरत है। उन्होंने बताया कि सांप किसान मित्र होते हैं क्योंकि वे चूहों और हानिकारक कीड़ों का शिकार करके पर्यावरण संतुलन बनाए रखते हैं। उन्होंने नागरिकों से आग्रह किया कि सांपों को मारने की बजाय वन विभाग या विशेषज्ञों को सूचित करें ताकि उन्हें सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जा सके।

वन्यजीव संरक्षण कानून के तहत अब रेड सैंड बोआ, व्हिटेकर बोआ, भारतीय कोबरा, किंग कोबरा, अजगर, रसल वाइपर, ब्लाइंड स्नेक, सन बीम स्नेक आदि को विशेष सुरक्षा दी गई है। इन संरक्षित प्रजातियों को मारने पर कठोर सजा और जुर्माने का प्रावधान किया गया है। उन्होंने सभी नागरिकों से अपील की कि वे वन्यजीवों की सुरक्षा सुनिश्चित करें, क्योंकि वे हमारी राष्ट्रीय धरोहर और प्रकृति की बहुमूल्य संपत्ति हैं। वन्यजीवों की रक्षा करना हम सभी का नैतिक और कानूनी दायित्व है।

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