निवाड़ीकला। क्षेत्र के ग्राम रतनपुर अंदावा में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का आयोजन धूमधाम से शुरू हुआ। कथा के पहले दिन कथावाचक अवधेश चंद दुबे ने धुंधकारी की कथा सुनाई। उन्होंने बताया कि धुंधकारी के भाई गोकर्ण ने भागवत कथा का आयोजन करके उसे प्रेत योनि से मुक्ति दिलाई थी।
कथा में बताया गया कि धुंधकारी, आत्मदेव और धुंधली के पुत्र थे। धुंधकारी ने अपनी मां को मार डाला और मृत्यु के बाद वह प्रेत बन गया। इस प्रेत योनि से मुक्ति पाने के लिए सूर्य भगवान ने गोकर्ण को सात गांठ बांस मंगाने और भागवत कथा का आयोजन करने की सलाह दी। गोकर्ण ने सात दिनों तक भागवत कथा का आयोजन किया। कथा सुनने के बाद धुंधकारी को प्रेत योनि से मुक्ति मिली।