सफारी पार्क में बब्बर शेरों के लिए एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस पर विशेष प्रोटोकॉल तैयार

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इटावा, 11 जनवरी। एशियाई शेरों के सबसे बड़े आशियाने, इटावा सफारी पार्क में बब्बर शेरों और शेरनियों के स्वास्थ्य संरक्षण के लिए एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस (रोगाणुरोधी प्रतिरोध) से लड़ने हेतु एक विशेष प्रोटोकॉल विकसित किया गया है। सफारी पार्क के निदेशक डॉ. अनिल कुमार पटेल ने बताया कि 6 शेरनियों और 3 शेरों के नमूनों का विश्लेषण करने पर यह पाया गया कि इनके शरीर में कई प्रचलित एंटीबायोटिक दवाओं के प्रति प्रतिरोध विकसित हो चुका है। हालांकि, कुछ एंटीबायोटिक्स अब भी प्रभावी हैं, जिनके विवेकपूर्ण इस्तेमाल से उनकी प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाई जा सकती है।

डॉ. पटेल ने जानकारी दी कि तमिलनाडु वेटरिनरी एंड एनिमल साइंसेज यूनिवर्सिटी के मद्रास वेटरिनरी कॉलेज, चेन्नई में हाल ही में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सेमिनार में विशेष रूप से बब्बर शेरों में एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस पर शोध पत्र प्रस्तुत किया गया। नया प्रोटोकॉल एंटीबायोटिक दवाओं के नियंत्रित उपयोग को सुनिश्चित करता है, जिससे शेरों और तेन्दुओं के उपचार में अत्यंत सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं।

पिछले कुछ महीनों में, रेस्क्यू किए गए एक तेंदुए में भी ज्यादातर एंटीबायोटिक्स के प्रति प्रतिरोध पाया गया था। डॉ. पटेल ने बताया कि यह स्थिति संभवतः तेंदुए द्वारा शिकार में एंटीबायोटिक युक्त खाद्य पदार्थों के सेवन से उत्पन्न हुई थी। नए प्रोटोकॉल के अनुसार तेंदुए का उपचार किया गया, और वह अब पूरी तरह स्वस्थ हो चुका है। इस पर आधारित एक शोध पत्र सरदार वल्लभभाई पटेल कृषि एवं प्रौद्योगिकी विश्वविद्यालय, मेरठ में आयोजित सेमिनार में प्रस्तुत किया गया।

सफारी पार्क के चिकित्सकों, डॉ. रॉबिन और डॉ. आर.के. सिंह ने बताया कि पार्क में बब्बर शेरों और तेंदुओं के स्वास्थ्य संरक्षण के लिए सभी आवश्यक कदम उठाए जा रहे हैं। इसके साथ ही भालुओं और हिरणों के स्वास्थ्य पर भी नजर रखी जाती है। प्रोटोकॉल इस प्रकार से तैयार किया गया है कि एंटीबायोटिक्स का प्रभावी और सुरक्षित उपयोग सुनिश्चित हो और एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस का खतरा न्यूनतम रहे।

वन्यजीवों की प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने के लिए एंटीबायोटिक्स के साथ-साथ न्यूट्रीशनल सप्लीमेंट का भी उपयोग किया जा रहा है। इसका उद्देश्य उनके शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाना और प्राकृतिक स्वास्थ्य को बनाए रखना है। डॉ. रॉबिन ने बताया कि प्रोटोकॉल के अंतर्गत सभी वन्यजीवों के स्वास्थ्य का नियमित रूप से मूल्यांकन किया जाता है।

यह प्रोटोकॉल इटावा सफारी पार्क के शेरों, तेंदुओं, भालुओं और हिरणों के दीर्घकालिक स्वास्थ्य संरक्षण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है। सफारी पार्क के विशेषज्ञों का यह प्रयास न केवल वन्यजीवों की सुरक्षा को सुनिश्चित करता है, बल्कि एंटी माइक्रोबियल रेजिस्टेंस जैसी वैश्विक समस्या के समाधान में भी एक महत्वपूर्ण योगदान है।

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