मैनपुरी, फरुखाबाद,आगरा तथा एटा वगैरह पडौस के सभी जिलो ने मुस्लिम विजेताओं की पूर्ण आधीनता स्वीकार की ओर उन्हें रहने के लिए स्थान दिया इसी करण उन जिलो में अनेक शेख सैयद मुग़ल तथा पठानों के वंश आबाद हो गए जिनके प्रभाव तथा दबे दबे से अनेकों प्रतिष्ठत हिंदू परिवार ने इस्लाम धर्म की दीक्षा ली परन्तु में दिल्ली सुल्तानो का दरवाजा केवल नाम मात्र की रहा इटावा के क्षत्रिय जमीदार जमी अवसर पते तभी दिल्ली राज्य से स्वतंत्रत हो जाते थे उन्होंने कभी भी दिल्ली सुल्तान को चैन से नहीं रहने दिया

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