गोरखपुर। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विजयादशमी के पावन पर्व पर प्रदेशवासियों को सत्य, धर्म, मर्यादा और सदाचार के मार्ग पर चलने का संदेश दिया। उन्होंने कहा कि विजयादशमी का पर्व केवल रावण के दस सिरों के दहन तक सीमित नहीं रहना चाहिए, बल्कि समाज में व्याप्त अन्याय, अत्याचार, अधर्म, भ्रष्टाचार, दुराचार, दुष्प्रचार और नशे जैसी बुराइयों के खिलाफ भी हमारी लड़ाई मजबूती के साथ आगे बढ़नी चाहिए। उन्होंने पर्व के मूल संदेश को जीवन में आत्मसात करने और समाज को बुराइयों से मुक्त बनाने के लिए सामूहिक प्रयासों की आवश्यकता पर जोर दिया।

विजयादशमी के पावन अवसर पर गोरखपुर स्थित गोरखनाथ मंदिर से ‘जय श्री राम’ के उद्घोष के बीच भव्य शोभायात्रा निकाली गई। आध्यात्मिक गरिमा और भक्तिमय वातावरण से परिपूर्ण इस आयोजन में धार्मिक आस्था और परंपरा का विशेष स्वरूप देखने को मिला। मंदिर परिसर में श्रद्धा एवं भक्ति का माहौल रहा। भगवान श्रीराम के जयकारों के बीच श्रद्धालुओं ने विजयादशमी के पर्व को उत्साह और श्रद्धाभाव के साथ मनाया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने भी धार्मिक अनुष्ठान में सहभागिता कर भगवान श्रीराम के आदर्शों को स्मरण किया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने इस पावन अवसर पर कौशल्यानंदन प्रभु श्रीराम, माता जानकी, भगवान श्रीलक्ष्मण एवं श्री हनुमान जी के स्वरूपों का पूजन-अर्चन किया। उन्होंने श्रद्धापूर्वक आराधना करते हुए विजयादशमी के आध्यात्मिक महत्व को रेखांकित किया। यह पर्व भारतीय संस्कृति में सत्य की असत्य पर, धर्म की अधर्म पर और अच्छाई की बुराई पर विजय का प्रतीक माना जाता है। भगवान श्रीराम के जीवन और उनके आदर्शों से प्रेरणा लेकर समाज में नैतिकता, न्याय और सदाचार को मजबूत करने का संदेश भी इस अवसर पर प्रमुखता से सामने आया।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश में स्पष्ट किया कि विजयादशमी को केवल एक पारंपरिक उत्सव के रूप में नहीं देखा जाना चाहिए। रावण के दस सिरों का दहन प्रतीकात्मक रूप से मनुष्य के भीतर मौजूद अहंकार, अन्याय और नकारात्मक प्रवृत्तियों के अंत का संदेश देता है। ऐसे में इस पर्व की वास्तविक सार्थकता तभी है, जब प्रत्येक व्यक्ति अपने जीवन में व्याप्त बुराइयों को पहचानकर उन्हें दूर करने का संकल्प ले।
उन्होंने अन्याय और अत्याचार के खिलाफ संघर्ष को आवश्यक बताते हुए कहा कि समाज में सत्य और न्याय की स्थापना के लिए निरंतर प्रयास किए जाने चाहिए। अधर्म और दुराचार जैसी प्रवृत्तियां सामाजिक व्यवस्था को कमजोर करती हैं, जबकि सदाचार, ईमानदारी और मर्यादित आचरण समाज को मजबूती प्रदान करते हैं। विजयादशमी लोगों को इन मूल्यों की याद दिलाने और उन्हें अपने व्यवहार में उतारने का अवसर प्रदान करती है।
मुख्यमंत्री के संदेश में भ्रष्टाचार और दुष्प्रचार जैसी बुराइयों के विरुद्ध संघर्ष पर भी विशेष जोर रहा। उन्होंने कहा कि विजयादशमी का संदेश व्यापक है और इसे जीवन के प्रत्येक क्षेत्र में अपनाने की आवश्यकता है। समाज में सकारात्मक वातावरण बनाने के लिए ईमानदारी, सत्यनिष्ठा और जिम्मेदारी की भावना को बढ़ावा देना जरूरी है।
भ्रष्टाचार जैसी बुराई विकास और जनविश्वास को प्रभावित करती है, वहीं दुष्प्रचार समाज में भ्रम और गलतफहमियां पैदा कर सकता है। ऐसे में सत्य को महत्व देना, तथ्यों के आधार पर विचार करना और अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से पालन करना आवश्यक है। विजयादशमी का पर्व लोगों को बुराइयों के विरुद्ध खड़े होने और सही रास्ते पर चलने की प्रेरणा देता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नशे को भी उन बुराइयों में शामिल किया, जिनके खिलाफ समाज को मजबूती से लड़ना चाहिए। नशे की प्रवृत्ति व्यक्ति के स्वास्थ्य, परिवार और सामाजिक जीवन पर प्रतिकूल प्रभाव डाल सकती है। इसलिए नशे से दूर रहने और समाज में जागरूकता बढ़ाने की जरूरत है।
विजयादशमी का अवसर लोगों को अपनी आदतों और व्यवहार की समीक्षा करने की प्रेरणा देता है। जिस प्रकार भगवान श्रीराम ने धर्म और मर्यादा के मार्ग पर चलते हुए अधर्म का अंत किया, उसी प्रकार प्रत्येक व्यक्ति को अपने जीवन में नकारात्मक प्रवृत्तियों को समाप्त करने का प्रयास करना चाहिए। परिवार, समाज और युवाओं के बीच सकारात्मक सोच को बढ़ावा देकर बेहतर सामाजिक वातावरण तैयार किया जा सकता है।
भगवान श्रीराम भारतीय संस्कृति में मर्यादा, कर्तव्यनिष्ठा, त्याग, सत्य और न्याय के प्रतीक माने जाते हैं। उनका जीवन यह प्रेरणा देता है कि कठिन परिस्थितियों में भी धर्म और सत्य का मार्ग नहीं छोड़ना चाहिए। विजयादशमी का पर्व इन्हीं आदर्शों को याद करने और उन्हें अपने आचरण में उतारने का अवसर है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संदेश के माध्यम से पर्व के इसी व्यापक अर्थ को सामने रखा। उन्होंने लोगों को प्रेरित किया कि वे केवल उत्सव मनाने तक सीमित न रहें, बल्कि समाज में मौजूद बुराइयों को दूर करने के लिए भी अपना योगदान दें। जब व्यक्ति अपने आचरण में ईमानदारी, संयम, मर्यादा और सदाचार को स्थान देता है, तभी सामाजिक जीवन में सकारात्मक परिवर्तन संभव होता है।
विजयादशमी के अवसर पर गोरखनाथ मंदिर से निकली भव्य शोभायात्रा धार्मिक आस्था और सांस्कृतिक परंपरा का प्रतीक बनी। ‘जय श्री राम’ के उद्घोष से वातावरण भक्तिमय हो उठा। इस पावन अवसर पर मुख्यमंत्री ने प्रभु श्रीराम, माता जानकी, भगवान श्रीलक्ष्मण और श्री हनुमान जी के स्वरूपों का पूजन-अर्चन कर अपनी श्रद्धा व्यक्त की।
शोभायात्रा और पूजन-अर्चन के माध्यम से विजयादशमी के धार्मिक महत्व के साथ ही भगवान श्रीराम के आदर्शों को स्मरण करने का अवसर मिला। यह पर्व लोगों को आपसी सद्भाव, नैतिकता और सामाजिक जिम्मेदारी का संदेश देता है। भारतीय परंपरा में विजयादशमी को नई शुरुआत और बुराइयों पर विजय के संकल्प से भी जोड़कर देखा जाता है।
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ का संदेश इस बात पर केंद्रित रहा कि विजयादशमी की वास्तविक भावना समाज में सकारात्मक बदलाव लाने में निहित है। रावण दहन के साथ-साथ व्यक्ति को अपने भीतर मौजूद अहंकार, क्रोध, लोभ और अन्य नकारात्मक प्रवृत्तियों पर विजय पाने का प्रयास करना चाहिए। इसके साथ ही अन्याय, अत्याचार, भ्रष्टाचार, दुराचार, दुष्प्रचार और नशे जैसी सामाजिक बुराइयों के खिलाफ सामूहिक रूप से खड़ा होना चाहिए।
उन्होंने विजयादशमी के पावन अवसर पर सत्य, मर्यादा, सदाचार और धर्म की विजय के संदेश को प्रमुखता से रखा। उनका आह्वान है कि समाज का प्रत्येक व्यक्ति अपने कर्तव्यों का ईमानदारी से निर्वहन करे और बुराइयों के खिलाफ संघर्ष में अपनी भूमिका निभाए। यही विजयादशमी के पर्व की सार्थकता है और यही भगवान श्रीराम के आदर्शों के प्रति सच्ची श्रद्धा भी है।
इस प्रकार गोरखनाथ मंदिर में आयोजित भव्य शोभायात्रा, पूजन-अर्चन और मुख्यमंत्री के संदेश ने विजयादशमी के धार्मिक एवं सामाजिक महत्व को रेखांकित किया। पर्व का संदेश स्पष्ट है कि अच्छाई की विजय केवल प्रतीकात्मक नहीं, बल्कि हमारे विचारों, व्यवहार और सामाजिक जीवन में भी दिखाई देनी चाहिए। सत्य और धर्म के मार्ग पर चलते हुए बुराइयों के खिलाफ संघर्ष जारी रखना ही विजयादशमी की मूल प्रेरणा है।
