सैफई (इटावा)। त्योहारों के दौरान पटाखों से होने वाली दुर्घटनाओं और जलने की घटनाओं को रोकने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (UPUMS), सैफई के प्लास्टिक सर्जरी विभाग की ओर से जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। विश्वविद्यालय की ओपीडी परिसर में आयोजित इस कार्यक्रम में लोगों को पटाखे जलाते समय बरती जाने वाली सावधानियों, आग से होने वाली चोटों से बचाव और जलने पर तुरंत दिए जाने वाले प्राथमिक उपचार की जानकारी दी गई। कार्यक्रम में डॉ. भूपेश गोगिया ने लोगों को सुरक्षित तरीके से त्योहार मनाने और दुर्घटना की स्थिति में सही समय पर चिकित्सा सहायता लेने के बारे में विस्तार से समझाया।

कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य लोगों को पटाखों के इस्तेमाल से जुड़े खतरों के प्रति जागरूक करना और किसी दुर्घटना की स्थिति में सही प्राथमिक उपचार के महत्व को समझाना रहा। त्योहारों के दौरान आतिशबाजी के कारण हाथ, पैर, चेहरे और आंखों में चोट लगने के साथ-साथ गंभीर रूप से जलने की घटनाएं भी सामने आ सकती हैं। ऐसी घटनाओं में थोड़ी-सी सावधानी और सही समय पर प्राथमिक उपचार से चोट की गंभीरता को कम करने में मदद मिल सकती है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए विश्वविद्यालय के प्लास्टिक सर्जरी विभाग ने आमजन को सुरक्षा संबंधी महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान की।
डॉ. भूपेश गोगिया ने बताया कि पटाखे हमेशा खुले स्थान पर जलाने चाहिए और उन्हें जलाते समय पर्याप्त सुरक्षित दूरी बनाए रखना आवश्यक है। पटाखों के आसपास भीड़ लगाने से बचना चाहिए तथा बच्चों को आतिशबाजी के दौरान अकेला नहीं छोड़ना चाहिए। बच्चों को पटाखे जलाने की अनुमति केवल वयस्कों की निगरानी में ही दी जानी चाहिए। उन्होंने यह भी समझाया कि यदि कोई पटाखा जलने में विफल रहता है, तो उसे दोबारा जलाने का प्रयास नहीं करना चाहिए, क्योंकि ऐसा करना खतरनाक हो सकता है।
कार्यक्रम में जलने की स्थिति में प्राथमिक उपचार के सही तरीके पर विशेष जोर दिया गया। डॉ. गोगिया ने बताया कि यदि पटाखे या आग से त्वचा जल जाए, तो प्रभावित स्थान को लगभग 20 मिनट तक साफ, ठंडे बहते पानी के नीचे रखना चाहिए। इससे जले हुए हिस्से को ठंडा करने और चोट की गंभीरता कम करने में मदद मिल सकती है। हालांकि, प्राथमिक उपचार करते समय सावधानी बरतना भी उतना ही जरूरी है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि जले हुए स्थान पर बर्फ, टूथपेस्ट, तेल, घी या अन्य घरेलू पदार्थ नहीं लगाने चाहिए। इस प्रकार के पदार्थ जलन और चोट के उपचार में बाधा डाल सकते हैं। प्रभावित स्थान को साफ, रोएं रहित ड्रेसिंग से ढकना चाहिए, ताकि घाव को अनावश्यक संपर्क और गंदगी से बचाया जा सके। गंभीर रूप से जलने की स्थिति में घरेलू उपचार पर निर्भर रहने के बजाय तत्काल चिकित्सकीय सहायता लेनी चाहिए।
डॉ. भूपेश गोगिया ने पटाखों से आंखों में चोट लगने की स्थिति को विशेष रूप से गंभीर बताते हुए तुरंत चिकित्सा सहायता लेने की सलाह दी। आंखों में चोट लगने पर स्वयं उपचार करने, आंखों को रगड़ने या किसी प्रकार की दवा डालने के बजाय विशेषज्ञ चिकित्सक से संपर्क करना चाहिए। इसी प्रकार, यदि जलने की चोट गंभीर हो, त्वचा गहराई तक प्रभावित हुई हो या शरीर के संवेदनशील हिस्सों पर चोट लगी हो, तो बिना देरी किए अस्पताल पहुंचना आवश्यक है।
जागरूकता कार्यक्रम के दौरान यह संदेश दिया गया कि त्योहारों की खुशियां बनाए रखने के लिए सुरक्षा नियमों का पालन करना बेहद जरूरी है। पटाखे जलाते समय लापरवाही न केवल व्यक्ति को नुकसान पहुंचा सकती है, बल्कि आसपास मौजूद अन्य लोगों के लिए भी खतरा पैदा कर सकती है। इसलिए सुरक्षित स्थान का चयन करना, पटाखों से उचित दूरी रखना और बच्चों की निगरानी करना प्रत्येक व्यक्ति की जिम्मेदारी है।
उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई के प्लास्टिक सर्जरी विभाग की इस पहल का उद्देश्य आमजन को दुर्घटनाओं से बचाव के साथ-साथ आपात स्थिति में सही कदम उठाने के प्रति जागरूक करना रहा। कार्यक्रम में प्राथमिक उपचार की जानकारी देकर लोगों को यह समझाने का प्रयास किया गया कि जलने की घटना होने पर गलत घरेलू उपाय अपनाने के बजाय वैज्ञानिक तरीके से प्राथमिक उपचार करना और आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ चिकित्सा सहायता लेना कितना महत्वपूर्ण है।
विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित इस जागरूकता कार्यक्रम ने लोगों को जिम्मेदारी के साथ त्योहार मनाने का संदेश दिया। पटाखों के सुरक्षित इस्तेमाल, बच्चों की निगरानी, जले हुए स्थान पर सही प्राथमिक उपचार और गंभीर चोट की स्थिति में तत्काल चिकित्सा सहायता लेने जैसी बातों पर विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों की सलाह और सावधानियों का पालन करके पटाखों से होने वाली दुर्घटनाओं के जोखिम को कम किया जा सकता है और त्योहारों को सभी के लिए सुरक्षित बनाया जा सकता है।
