उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (यूपीयूएमएस), सैफई के एनेस्थीसियोलॉजी विभाग की ओर से मंगलवार, 13 अक्टूबर 2026 को राजकीय बालिका इंटर कॉलेज, सैफई में बेसिक लाइफ सपोर्ट (बीएलएस) एवं जीवनरक्षक तकनीकों पर जागरूकता कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला का उद्देश्य छात्राओं को आपातकालीन परिस्थितियों में जीवन बचाने के लिए आवश्यक जानकारी और व्यावहारिक कौशल से परिचित कराना था। कार्यक्रम में लगभग 200 छात्राओं ने प्रतिभाग किया और विशेषज्ञों से सीपीआर, प्राथमिक उपचार तथा दुर्घटना के समय तत्काल सहायता उपलब्ध कराने के तरीकों की जानकारी प्राप्त की।

यह कार्यशाला विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. (डॉ.) अजय सिंह के नेतृत्व तथा प्रो. (डॉ.) ऊषा शुक्ला, संकायाध्यक्ष, चिकित्सा संकाय एवं विभागाध्यक्ष, एनेस्थीसियोलॉजी के मार्गदर्शन में आयोजित की गई। कार्यक्रम के दौरान छात्राओं को बताया गया कि किसी व्यक्ति के अचानक बेहोश होने, सांस लेने में परेशानी होने या दुर्घटना का शिकार होने की स्थिति में शुरुआती सहायता बेहद महत्वपूर्ण हो सकती है। ऐसी परिस्थितियों में घबराने के बजाय सही जानकारी के आधार पर त्वरित कदम उठाना और जरूरत पड़ने पर चिकित्सा सहायता बुलाना आवश्यक है।
कार्यशाला में विशेषज्ञों ने कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (CPR) यानी हृदय और सांस से जुड़ी आपात स्थिति में दी जाने वाली जीवनरक्षक प्रक्रिया के बारे में विस्तार से जानकारी दी। छात्राओं को समझाया गया कि किसी व्यक्ति के अचानक गिरने या बेहोश होने पर स्थिति का आकलन करना, आसपास मौजूद लोगों से मदद लेना और आपातकालीन चिकित्सा सहायता तक पहुंचने में देर नहीं करना जरूरी है। सीपीआर जैसी तकनीकों की सही जानकारी आपात स्थिति में मददगार साबित हो सकती है।
सैद्धांतिक जानकारी के साथ छात्राओं को व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिया गया। विशेषज्ञों के मार्गदर्शन में उन्होंने मैनिकिन पर छाती दबाने (चेस्ट कंप्रेशन) की तकनीक का अभ्यास किया। इस अभ्यास के माध्यम से छात्राओं को जीवनरक्षक प्रक्रिया की बुनियादी समझ विकसित करने का अवसर मिला। प्रशिक्षण में सही तरीके से अभ्यास करने और ऐसी तकनीकों को प्रशिक्षित विशेषज्ञों के निर्देशों के अनुसार अपनाने पर जोर दिया गया।
कार्यशाला के दौरान सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को तत्काल सहायता देने, बेहोशी की स्थिति में उचित कदम उठाने तथा दम घुटने और डूबने जैसी आपातकालीन परिस्थितियों में बरती जाने वाली सावधानियों की जानकारी भी दी गई। छात्राओं को प्राथमिक उपचार की उपयोगिता समझाते हुए बताया गया कि दुर्घटना के बाद शुरुआती समय में सही प्रतिक्रिया महत्वपूर्ण होती है। हालांकि, प्राथमिक सहायता देते समय अपनी सुरक्षा का ध्यान रखना और गंभीर स्थिति में तत्काल पेशेवर चिकित्सा सहायता लेना भी जरूरी है।
कार्यक्रम का आयोजन डॉ. विक्रम सिंह राठौर एवं डॉ. शिप्रा वर्मा द्वारा किया गया। इस अवसर पर रेजिडेंट चिकित्सक डॉ. अनुज, डॉ. अनिल तथा डॉ. मोहम्मद अली उपस्थित रहे। चिकित्सा विशेषज्ञों ने छात्राओं को जीवनरक्षक तकनीकों की जानकारी देकर उन्हें आपात स्थितियों के प्रति जागरूक रहने के लिए प्रेरित किया।
इस पहल के माध्यम से विश्वविद्यालय ने चिकित्सा संबंधी जागरूकता को शैक्षणिक संस्थानों तक पहुंचाने और छात्राओं को जीवन बचाने से जुड़ी बुनियादी जानकारी देने का प्रयास किया। विद्यालयों में इस तरह के प्रशिक्षण कार्यक्रमों से विद्यार्थियों को यह समझने में मदद मिल सकती है कि आपातकालीन स्थिति में किस प्रकार शांत रहकर सहायता उपलब्ध करानी है और किन परिस्थितियों में तत्काल चिकित्सकीय हस्तक्षेप आवश्यक होता है।
कार्यशाला का मूल संदेश यही रहा कि जीवनरक्षक तकनीकों की जानकारी केवल चिकित्सा क्षेत्र से जुड़े लोगों तक सीमित नहीं रहनी चाहिए, बल्कि आम नागरिकों को भी इसकी बुनियादी समझ होनी चाहिए। हर व्यक्ति जीवनरक्षक बने और हर आपात स्थिति में समय पर सहायता मिले, इसी उद्देश्य के साथ यूपीयूएमएस सैफई के एनेस्थीसियोलॉजी विभाग ने छात्राओं को जागरूक करने की पहल की।
