विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (यूपीयूएमएस), सैफई के मनोचिकित्सा विभाग की ओर से मरीजों और उनके तीमारदारों के लिए मानसिक स्वास्थ्य जागरूकता कार्यक्रम आयोजित किया गया। विश्वविद्यालय के माननीय कुलपति प्रो. (डॉ.) अजय सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य लोगों को मानसिक स्वास्थ्य के प्रति जागरूक करना, मानसिक बीमारियों से जुड़े सामाजिक कलंक को दूर करना और जरूरत पड़ने पर समय से विशेषज्ञों की मदद लेने के लिए प्रेरित करना रहा। कार्यक्रम का आयोजन ओपीडी G2 और G3 में किया गया, जहां मरीजों तथा उनके साथ आए परिजनों को मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित महत्वपूर्ण जानकारियां दी गईं।

कार्यक्रम का संचालन मनोचिकित्सा विभाग के सहायक आचार्य डॉ. प्रशांत चौधरी और डॉ. धीरेन्द्र कुमार ने किया। उन्होंने मानसिक स्वास्थ्य को व्यक्ति के समग्र स्वास्थ्य का अभिन्न हिस्सा बताते हुए कहा कि जिस प्रकार शारीरिक बीमारियों की पहचान और उपचार आवश्यक है, उसी प्रकार मानसिक परेशानियों को समझना और समय रहते उचित सहायता प्राप्त करना भी महत्वपूर्ण है। मानसिक स्वास्थ्य का प्रभाव व्यक्ति की सोच, व्यवहार, भावनाओं, पारिवारिक संबंधों और दैनिक जीवन की गतिविधियों पर पड़ता है। इसलिए मानसिक परेशानियों को नजरअंदाज करने के बजाय उनके प्रति जागरूक रहना चाहिए।
जागरूकता कार्यक्रम के दौरान मरीजों और तीमारदारों को बताया गया कि मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी समस्याओं को लेकर समाज में प्रचलित गलत धारणाओं और झिझक को दूर करना जरूरी है। कई बार लोग तनाव, चिंता, उदासी या अन्य मानसिक परेशानियों को खुलकर साझा नहीं कर पाते, जिसके कारण उन्हें उचित सहायता मिलने में देरी हो सकती है। ऐसी स्थिति में परिवार और समाज का सहयोग महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं को कमजोरी समझने के बजाय उन्हें स्वास्थ्य से जुड़ा विषय मानकर उचित मार्गदर्शन और उपचार की दिशा में कदम उठाना चाहिए।
कार्यक्रम में बेहतर मानसिक स्वास्थ्य बनाए रखने के लिए दैनिक जीवन में स्वस्थ आदतों को अपनाने पर विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने पर्याप्त नींद लेने, नियमित शारीरिक व्यायाम करने, संतुलित आहार का सेवन करने और तनाव को नियंत्रित रखने की उपयोगिता के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया कि व्यवस्थित दिनचर्या और स्वस्थ जीवनशैली मानसिक एवं शारीरिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में सहायक हो सकती है। इसके साथ ही परिवार के सदस्यों और मित्रों के साथ सकारात्मक संबंध बनाए रखना तथा जरूरत के समय अपनी परेशानियों को साझा करना भी मानसिक स्वास्थ्य के लिए उपयोगी है।
डॉ. प्रशांत चौधरी और डॉ. धीरेन्द्र कुमार ने मानसिक स्वास्थ्य से संबंधित समस्याओं के प्रति संवेदनशील दृष्टिकोण अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने मरीजों और उनके परिजनों को समझाया कि मानसिक परेशानी होने पर समय पर योग्य स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लेना चाहिए। शुरुआती स्तर पर समस्या को पहचानना और उचित सहायता प्राप्त करना व्यक्ति को अपनी स्थिति बेहतर ढंग से संभालने में मदद कर सकता है। मानसिक स्वास्थ्य से जुड़े विषयों पर खुलकर चर्चा करने से लोगों में जागरूकता बढ़ती है और उपचार प्राप्त करने में होने वाली झिझक कम करने में सहायता मिलती है।
विश्वविद्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में मरीजों के साथ उनके तीमारदारों को भी शामिल किया गया, क्योंकि मानसिक स्वास्थ्य संबंधी परेशानियों से गुजर रहे व्यक्तियों के लिए परिवार का सहयोग महत्वपूर्ण हो सकता है। परिजनों को मरीजों की बात ध्यानपूर्वक सुनने, उनकी परेशानियों को गंभीरता से समझने और आवश्यकता पड़ने पर विशेषज्ञ की सलाह लेने के लिए प्रोत्साहित किया गया। सहयोगपूर्ण वातावरण व्यक्ति के आत्मविश्वास को बढ़ाने और मानसिक स्वास्थ्य के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित करने में सहायक हो सकता है।
विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस के अवसर पर आयोजित इस जागरूकता कार्यक्रम के माध्यम से यूपीयूएमएस सैफई के मनोचिकित्सा विभाग ने यह संदेश दिया कि मानसिक स्वास्थ्य भी शारीरिक स्वास्थ्य जितना ही महत्वपूर्ण है। मानसिक परेशानियों के लिए सहायता लेना कमजोरी नहीं, बल्कि अपनी सेहत के प्रति जिम्मेदारी और साहस का परिचायक है। विश्वविद्यालय की ओर से आयोजित यह पहल मरीजों और उनके परिजनों तक मानसिक स्वास्थ्य से जुड़ी आवश्यक जानकारी पहुंचाने तथा समाज में जागरूकता बढ़ाने की दिशा में महत्वपूर्ण रही।
