गांधी-शास्त्री जयंती पर UPUMS ने शुरू की डिजिटल एजुकेशन लैब, जरूरतमंद बच्चों को मिलेगा आधुनिक शिक्षा का लाभ

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सैफई। राष्ट्रपिता महात्मा गांधी एवं भारत के पूर्व प्रधानमंत्री लाल बहादुर शास्त्री की जयंती के अवसर पर उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (UPUMS), सैफई ने शिक्षा और सामाजिक उत्तरदायित्व के क्षेत्र में एक नई पहल करते हुए डिजिटल एजुकेशन लैब का शुभारंभ किया। इस पहल का उद्देश्य समाज के वंचित एवं जरूरतमंद बच्चों को आधुनिक शिक्षा प्रणाली से जोड़ना तथा उन्हें शुरुआती स्तर से ही डिजिटल शिक्षण संसाधनों की सुविधा उपलब्ध कराना है। विश्वविद्यालय की इस पहल को शिक्षा के क्षेत्र में समावेशी विकास की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।

विश्वविद्यालय प्रशासन के अनुसार डिजिटल एजुकेशन लैब के माध्यम से बच्चों को कक्षा एक से ही तकनीक आधारित शिक्षा, स्मार्ट लर्निंग संसाधन और आधुनिक शैक्षणिक उपकरणों का लाभ दिया जाएगा। इससे बच्चों में सीखने की क्षमता विकसित होगी और उन्हें डिजिटल युग की आवश्यकताओं के अनुरूप तैयार किया जा सकेगा। साथ ही आर्थिक रूप से कमजोर परिवारों के बच्चों को भी गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के समान अवसर उपलब्ध कराने का प्रयास किया जाएगा।

डिजिटल एजुकेशन लैब के शुभारंभ अवसर पर आयोजित कार्यक्रम में शिक्षा के क्षेत्र में तकनीक की बढ़ती भूमिका और उसके महत्व पर विस्तार से चर्चा की गई। वक्ताओं ने कहा कि वर्तमान समय में डिजिटल शिक्षा केवल एक विकल्प नहीं, बल्कि समय की आवश्यकता बन चुकी है। ऐसे में समाज के प्रत्येक वर्ग तक तकनीकी शिक्षा की पहुंच सुनिश्चित करना आवश्यक है, ताकि कोई भी बच्चा संसाधनों के अभाव में शिक्षा से वंचित न रहे।

कार्यक्रम को संबोधित करते हुए UPUMS के कुलपति प्रो. (डॉ.) अजय सिंह ने कहा कि महात्मा गांधी और लाल बहादुर शास्त्री के विचारों को केवल स्मरण करने से अधिक महत्वपूर्ण है कि उन्हें व्यवहार में उतारा जाए। उन्होंने कहा कि जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा और आधुनिक संसाधनों से जोड़ना दोनों महान विभूतियों के सेवा, समानता और समाज कल्याण के आदर्शों को आगे बढ़ाने का प्रयास है।

कुलपति ने कहा कि शिक्षा किसी भी राष्ट्र और समाज के विकास की आधारशिला होती है। यदि बच्चों को प्रारंभिक अवस्था से ही तकनीकी ज्ञान और आधुनिक शिक्षण संसाधनों से जोड़ा जाए तो वे भविष्य में बेहतर अवसर प्राप्त कर सकते हैं। उन्होंने कहा कि विश्वविद्यालय स्वास्थ्य सेवाओं के साथ-साथ शिक्षा और सामाजिक सशक्तिकरण के क्षेत्र में भी अपनी जिम्मेदारियों का निर्वहन कर रहा है और डिजिटल एजुकेशन लैब इसी सोच का परिणाम है।

उन्होंने कहा कि आधुनिक तकनीक ने शिक्षा के स्वरूप को बदल दिया है। अब बच्चों को केवल पुस्तकीय ज्ञान तक सीमित नहीं रखा जा सकता, बल्कि उन्हें डिजिटल प्लेटफॉर्म, इंटरएक्टिव लर्निंग टूल्स और तकनीकी संसाधनों से भी जोड़ना आवश्यक है। यह पहल बच्चों में रचनात्मकता, आत्मविश्वास और सीखने की नई संभावनाओं को विकसित करने में सहायक होगी।

कार्यक्रम के दौरान यह जानकारी भी दी गई कि डिजिटल एजुकेशन लैब में बच्चों को तकनीक आधारित अध्ययन सामग्री उपलब्ध कराई जाएगी, जिससे वे नई शिक्षण पद्धतियों से परिचित हो सकेंगे। इससे उनकी शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार होने के साथ-साथ डिजिटल साक्षरता भी बढ़ेगी। विश्वविद्यालय का प्रयास है कि समाज के ऐसे बच्चों तक भी आधुनिक शिक्षा पहुंचे, जो संसाधनों के अभाव में इन सुविधाओं से दूर रह जाते हैं।

गांधी जयंती और शास्त्री जयंती के अवसर पर शुरू की गई इस पहल को सामाजिक समावेशन और शैक्षणिक समानता की दिशा में एक सार्थक कदम माना जा रहा है। विश्वविद्यालय का मानना है कि समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े बच्चों तक शिक्षा और तकनीक की पहुंच सुनिश्चित करना ही वास्तविक सामाजिक सशक्तिकरण है। यही भावना महात्मा गांधी के अंत्योदय और लाल बहादुर शास्त्री के जनसेवा के विचारों को भी साकार करती है।

इस अवसर पर उपस्थित लोगों ने विश्वविद्यालय की इस पहल की सराहना करते हुए कहा कि डिजिटल एजुकेशन लैब जरूरतमंद बच्चों के लिए नई संभावनाओं के द्वार खोलेगी। इससे उन्हें आधुनिक शिक्षा प्रणाली से जुड़ने और भविष्य में बेहतर अवसर प्राप्त करने में सहायता मिलेगी।

कार्यक्रम का समापन शिक्षा, सेवा और सामाजिक सशक्तिकरण के संकल्प के साथ हुआ। विश्वविद्यालय प्रशासन ने भविष्य में भी शिक्षा, स्वास्थ्य और समाज कल्याण से जुड़ी ऐसी जनहितकारी पहलों को आगे बढ़ाने की प्रतिबद्धता दोहराई और कहा कि UPUMS सैफई समाज के हर वर्ग तक विकास और अवसरों की पहुंच सुनिश्चित करने के लिए निरंतर कार्य करता रहेगा।

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