इटावा। भारत विकास परिषद, मुख्य शाखा इटावा द्वारा पांचाल प्रांत संस्कृति सप्ताह के अंतर्गत “भारत की महान विभूतियाँ एवं श्लोक पाठ प्रतियोगिता” का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में बड़ी संख्या में विद्यार्थियों, शिक्षकों, अभिभावकों तथा सामाजिक कार्यकर्ताओं ने सहभागिता की। प्रतियोगिता का उद्देश्य नई पीढ़ी को भारतीय संस्कृति, संस्कारों और राष्ट्र निर्माण में योगदान देने वाली महान विभूतियों के जीवन से परिचित कराना था।

कार्यक्रम में मुख्य अतिथि के रूप में पूर्व सांसद रघुराज सिंह शाक्य शामिल हुए। उन्होंने प्रतियोगिता में प्रतिभाग करने वाले बच्चों का उत्साहवर्धन करते हुए कहा कि भारतीय संस्कृति विश्व की सबसे प्राचीन और समृद्ध संस्कृतियों में से एक है। हमारी महान विभूतियों के आदर्श, त्याग और जीवन मूल्यों से प्रेरणा लेकर युवा पीढ़ी राष्ट्र निर्माण में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।
प्रतियोगिता के दौरान प्रतिभागियों ने भारत की महान विभूतियों के जीवन, उनके योगदान और आदर्शों पर प्रभावशाली प्रस्तुतियां दीं। वहीं श्लोक पाठ प्रतियोगिता में विद्यार्थियों ने संस्कृत श्लोकों का सस्वर एवं शुद्ध उच्चारण कर अपनी प्रतिभा का परिचय दिया। कार्यक्रम में मौजूद लोगों ने बच्चों के आत्मविश्वास और प्रस्तुति की सराहना की।
मुख्य अतिथि रघुराज सिंह शाक्य ने कहा कि संस्कृत श्लोक केवल धार्मिक या साहित्यिक धरोहर नहीं हैं, बल्कि उनमें जीवन प्रबंधन, नैतिकता और मानवीय मूल्यों का अमूल्य ज्ञान निहित है। ऐसे आयोजनों के माध्यम से बच्चों को अपनी जड़ों और सांस्कृतिक विरासत से जोड़ने का महत्वपूर्ण कार्य किया जा रहा है।
उन्होंने भारत विकास परिषद द्वारा संस्कृति सप्ताह के अंतर्गत किए जा रहे प्रयासों की प्रशंसा करते हुए कहा कि समाज में संस्कार, सेवा और राष्ट्रभक्ति की भावना को मजबूत बनाने के लिए इस प्रकार के कार्यक्रम समय की आवश्यकता हैं। नई पीढ़ी को भारतीय परंपराओं और सांस्कृतिक मूल्यों से जोड़ने में इन आयोजनों की महत्वपूर्ण भूमिका है।
कार्यक्रम के अंत में उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले प्रतिभागियों को सम्मानित किया गया। रघुराज सिंह शाक्य ने भारत विकास परिषद के पदाधिकारियों, सदस्यों एवं सभी प्रतिभागियों को सफल आयोजन के लिए बधाई देते हुए उनके उज्ज्वल भविष्य की कामना की। कार्यक्रम में कृष्ण मुरारी गुप्ता सहित परिषद के अनेक पदाधिकारी, सामाजिक कार्यकर्ता एवं गणमान्य नागरिक उपस्थित रहे।
कार्यक्रम का संदेश स्पष्ट था कि संस्कारों से समृद्ध युवा ही एक सशक्त, जागरूक और सांस्कृतिक रूप से समृद्ध राष्ट्र के निर्माण की आधारशिला बन सकते हैं।
