नई दिल्ली। देश में बढ़ते साइबर अपराधों से निपटने के लिए केंद्र सरकार ने बहुस्तरीय तंत्र विकसित किया है, जिसके सकारात्मक परिणाम सामने आ रहे हैं। केंद्र सरकार ने स्पष्ट किया है कि ‘पुलिस’ और ‘सार्वजनिक व्यवस्था’ संविधान की सातवीं अनुसूची के अनुसार राज्यों का विषय है, इसलिए साइबर अपराध सहित सभी अपराधों की रोकथाम, जांच और अभियोजन की प्राथमिक जिम्मेदारी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों की कानून प्रवर्तन एजेंसियों (एलईए) की है।
हालांकि, केंद्र सरकार इन प्रयासों को मजबूत बनाने के लिए विभिन्न योजनाओं के तहत राज्यों को सलाह और वित्तीय सहायता प्रदान करती है। इसी क्रम में गृह मंत्रालय द्वारा वर्ष 2018 में भारतीय साइबर अपराध समन्वय केंद्र (आई4सी) की स्थापना की गई, जिसका उद्देश्य साइबर अपराधों की रोकथाम, जांच और अभियोजन के लिए एक सशक्त ढांचा तैयार करना है।
आई4सी ने कम समय में कानून प्रवर्तन एजेंसियों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करते हुए साइबर अपराध से निपटने की राष्ट्रीय क्षमता को मजबूत किया है। 1 जुलाई 2024 से इसे गृह मंत्रालय के संलग्न कार्यालय के रूप में स्थापित किया गया है। यह केंद्र नागरिकों से जुड़े साइबर अपराधों के समाधान, जागरूकता, क्षमता निर्माण और विभिन्न एजेंसियों के बीच तालमेल बढ़ाने पर कार्य कर रहा है।
आई4सी के तहत वर्ष 2021 में ‘नागरिक वित्तीय साइबर धोखाधड़ी रिपोर्टिंग एवं प्रबंधन प्रणाली’ (सीएफसीएफआरएमएस) शुरू की गई। इस प्रणाली के माध्यम से 31 जनवरी 2026 तक 24.65 लाख से अधिक शिकायतों में ₹8,690 करोड़ से अधिक की राशि को ठगी से बचाया गया है। साथ ही, साइबर शिकायत दर्ज कराने के लिए टोल-फ्री हेल्पलाइन नंबर 1930 भी सक्रिय किया गया है।
सरकार के अनुसार, 31 जनवरी 2026 तक पुलिस द्वारा रिपोर्ट किए गए 12.94 लाख से अधिक सिम कार्ड और 3.03 लाख मोबाइल आईएमईआई नंबर ब्लॉक किए जा चुके हैं। इसके अलावा, आई4सी ने 10 सितंबर 2024 को बैंकों और वित्तीय संस्थानों के सहयोग से साइबर अपराधियों के संदिग्ध पहचानकर्ताओं की रजिस्ट्री शुरू की। अब तक 23.05 लाख से अधिक संदिग्ध पहचानकर्ता और 27.37 लाख म्यूल खाते साझा किए गए, जिससे ₹9,518 करोड़ से अधिक के संदिग्ध लेनदेन रोके गए हैं।
आई4सी का समन्वय प्लेटफॉर्म प्रबंधन सूचना प्रणाली (एमआईएस), डेटा रिपॉजिटरी और विश्लेषण उपकरण के रूप में कार्य कर रहा है, जो राज्यों के बीच अपराध और अपराधियों के अंतरराज्यीय संबंधों का विश्लेषण प्रदान करता है। ‘प्रतिबिंब’ मॉड्यूल के जरिए अपराधियों और उनके नेटवर्क की लोकेशन मैप पर चिन्हित की जाती है, जिससे जांच एजेंसियों को कार्रवाई में मदद मिलती है। इस मॉड्यूल की सहायता से अब तक 21,857 से अधिक आरोपियों की गिरफ्तारी हो चुकी है और 1,49,636 से अधिक जांच सहायता अनुरोध प्राप्त हुए हैं।
साइबर अपराध मामलों में त्वरित कार्रवाई के लिए केंद्र सरकार ने ई-एफआईआर प्रणाली भी शुरू की है, जिसे फिलहाल दिल्ली, राजस्थान, चंडीगढ़, मध्य प्रदेश, गोवा और उत्तराखंड में लागू किया गया है।
सरकार का मानना है कि इन पहलों से साइबर अपराध पर प्रभावी नियंत्रण के साथ-साथ नागरिकों की डिजिटल सुरक्षा और विश्वास में भी उल्लेखनीय वृद्धि होगी।
