सैफई (इटावा)। स्तन कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने, बीमारी से जूझकर उबरने वाली महिलाओं के साहस को सम्मानित करने और उपचार करा रहे मरीजों में उम्मीद जगाने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (UPUMS), सैफई में सम्मान समारोह आयोजित किया गया। अक्टूबर माह में मनाए जा रहे स्तन कैंसर जागरूकता माह-2026 के अंतर्गत विश्वविद्यालय के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग की ओर से 500 बेडेड सुपर स्पेशियलिटी ब्लॉक स्थित रेडिएशन ऑन्कोलॉजी ओपीडी में यह कार्यक्रम आयोजित किया गया। इसमें स्तन कैंसर से उबर चुकी महिलाओं के संघर्ष, साहस, आत्मविश्वास और दृढ़ संकल्प को सम्मानित किया गया।

कार्यक्रम का उद्देश्य स्तन कैंसर से जूझने के बाद स्वस्थ जीवन की ओर आगे बढ़ रही महिलाओं के अनुभवों को सम्मान देना और अन्य मरीजों को सकारात्मक संदेश देना रहा। कैंसर का उपचार मरीजों के लिए शारीरिक, मानसिक और भावनात्मक रूप से चुनौतीपूर्ण हो सकता है। ऐसे में बीमारी से उबर चुके लोगों की यात्रा दूसरे मरीजों के लिए प्रेरणा का स्रोत बनती है। सम्मान समारोह के माध्यम से यह संदेश दिया गया कि समय पर बीमारी की पहचान, उचित उपचार, नियमित चिकित्सकीय परामर्श और परिवार के सहयोग से मरीजों को उपचार की यात्रा में महत्वपूर्ण संबल मिल सकता है।
विश्वविद्यालय के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग की इस पहल में स्तन कैंसर सर्वाइवर्स के साहस और दृढ़ इच्छाशक्ति को विशेष महत्व दिया गया। कार्यक्रम के माध्यम से उन महिलाओं के प्रति सम्मान व्यक्त किया गया, जिन्होंने बीमारी और उपचार की चुनौतियों का सामना करते हुए आगे बढ़ने का संकल्प बनाए रखा। साथ ही, कैंसर का उपचार करा रहे मरीजों को निराशा से दूर रहने, चिकित्सकों की सलाह का पालन करने और उपलब्ध चिकित्सा सुविधाओं का लाभ लेने के लिए प्रोत्साहित करने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम के दौरान स्तन कैंसर की शुरुआती पहचान और समय पर निदान के महत्व पर जोर दिया गया। स्तन कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए जरूरी है कि महिलाएं अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दें और शरीर में किसी असामान्य बदलाव को नजरअंदाज न करें। स्तन में गांठ, आकार में बदलाव, त्वचा में असामान्यता या निप्पल से संबंधित किसी नए लक्षण की स्थिति में चिकित्सकीय सलाह लेना महत्वपूर्ण है। हालांकि, ऐसे लक्षण होने का अर्थ हमेशा कैंसर होना नहीं है, लेकिन उनकी जांच कराना जरूरी होता है।
स्तन कैंसर की पहचान और उपचार में देरी से बचने के लिए समय पर चिकित्सकीय परामर्श आवश्यक है। जांच की प्रक्रिया और उसकी आवृत्ति महिला की उम्र, पारिवारिक इतिहास तथा अन्य जोखिम कारकों के अनुसार अलग-अलग हो सकती है। इसलिए विशेषज्ञ चिकित्सक की सलाह के अनुसार जांच और आगे की चिकित्सा प्रक्रिया अपनाना उचित रहता है। जागरूकता कार्यक्रम का एक प्रमुख उद्देश्य महिलाओं को स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं पर खुलकर बात करने और जरूरत पड़ने पर समय से चिकित्सा सहायता लेने के लिए प्रेरित करना रहा।
स्तन कैंसर के उपचार के बाद नियमित फॉलोअप का भी विशेष महत्व होता है। चिकित्सक की सलाह के अनुसार समय-समय पर जांच कराने से स्वास्थ्य की निगरानी करने और जरूरत पड़ने पर आगे की चिकित्सा योजना बनाने में मदद मिलती है। उपचार पूरा होने के बाद भी मरीजों को निर्धारित चिकित्सकीय परामर्श का पालन करना चाहिए।
इसके साथ ही, कैंसर से प्रभावित महिलाओं को भावनात्मक सहयोग देना भी बेहद महत्वपूर्ण है। बीमारी के दौरान मरीज को परिवार के सदस्यों, मित्रों और स्वास्थ्यकर्मियों के सहयोग की आवश्यकता हो सकती है। परिवार का प्रोत्साहन, संवेदनशील व्यवहार और मरीज की बातों को समझना उनके आत्मविश्वास को मजबूत करने में मदद कर सकता है। कार्यक्रम के माध्यम से मरीज-केंद्रित और संवेदनशील चिकित्सा देखभाल की आवश्यकता को भी रेखांकित किया गया।
स्तन कैंसर के प्रति जागरूकता बढ़ाने के लिए समाज में मौजूद भ्रम और झिझक को दूर करना भी आवश्यक है। कई बार जानकारी के अभाव या सामाजिक संकोच के कारण महिलाएं लक्षणों को नजरअंदाज कर देती हैं अथवा जांच कराने में देरी करती हैं। ऐसी स्थिति में जागरूकता अभियान महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं। लोगों को बीमारी से संबंधित सही जानकारी उपलब्ध कराना, समय पर चिकित्सकीय सहायता के लिए प्रेरित करना और कैंसर से प्रभावित व्यक्तियों के प्रति संवेदनशीलता विकसित करना इस तरह के आयोजनों के प्रमुख उद्देश्य हैं।
स्तन कैंसर से उबर चुकी महिलाओं का सम्मान समाज को यह संदेश देता है कि कैंसर से प्रभावित लोगों को सहानुभूति के साथ-साथ सम्मान, सहयोग और समान अवसर भी मिलने चाहिए। उनकी जीवन यात्रा अन्य मरीजों के लिए आशा का संदेश देती है और यह समझ विकसित करती है कि उपचार के दौरान मरीजों का मनोबल बनाए रखना भी देखभाल का महत्वपूर्ण हिस्सा है।
उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई के रेडिएशन ऑन्कोलॉजी विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम ने स्तन कैंसर जागरूकता माह के संदेश को आगे बढ़ाया। कार्यक्रम में शुरुआती पहचान, समय पर निदान, उचित उपचार, नियमित फॉलोअप, पारिवारिक सहयोग और मरीज-केंद्रित चिकित्सा देखभाल के महत्व को प्रमुखता से सामने रखा गया।
सम्मान समारोह का संदेश रहा कि स्तन कैंसर से उबरने वाली प्रत्येक महिला का अनुभव साहस, धैर्य और दृढ़ संकल्प की प्रेरक कहानी है। ऐसी महिलाओं का सम्मान करने से उपचार करा रहे मरीजों को उम्मीद मिलती है और समाज में कैंसर के प्रति सकारात्मक दृष्टिकोण विकसित होता है। विश्वविद्यालय की इस पहल के माध्यम से लोगों से अपील की गई कि वे स्तन कैंसर के प्रति जागरूकता फैलाएं, बीमारी से जुड़े सामाजिक संकोच को दूर करें और कैंसर से प्रभावित प्रत्येक व्यक्ति के साथ संवेदनशीलता एवं सहयोग का व्यवहार करें।
