उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय (यूपीयूएमएस), सैफई की ओर से संचालित सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय, राजपुर गांव, करहल में सर्पदंश जागरूकता कार्यक्रम का आयोजन किया गया। विश्वविद्यालय के फॉरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग की ओर से आयोजित इस कार्यक्रम का उद्देश्य विद्यार्थियों, शिक्षकों और ग्रामीणों को सांप के काटने से बचाव, घटना के बाद बरती जाने वाली आवश्यक सावधानियों तथा समय पर उचित चिकित्सकीय उपचार के महत्व के प्रति जागरूक करना रहा। कार्यक्रम के माध्यम से लोगों को बताया गया कि सर्पदंश की स्थिति में सही जानकारी और तत्काल चिकित्सा सहायता जीवन बचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है।

यह जागरूकता कार्यक्रम विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डॉ. अजय सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। कार्यक्रम के दौरान सर्पदंश से संबंधित जरूरी जानकारियां साझा करते हुए लोगों को इसके प्रति व्याप्त भ्रांतियों और अंधविश्वास से दूर रहने का संदेश दिया गया। ग्रामीण क्षेत्रों में सर्पदंश की घटनाओं के दौरान कई बार लोग तत्काल अस्पताल पहुंचने के बजाय झाड़-फूंक अथवा पारंपरिक उपायों में समय गंवा देते हैं। ऐसी परिस्थितियों में उपचार में देरी मरीज के लिए गंभीर साबित हो सकती है। इसी को ध्यान में रखते हुए कार्यक्रम में समय पर अस्पताल पहुंचने और प्रशिक्षित चिकित्सकों से उपचार कराने की आवश्यकता पर विशेष जोर दिया गया।
कार्यक्रम में बताया गया कि यदि किसी व्यक्ति को सांप काट ले, तो सबसे पहले उसे शांत रखना चाहिए और बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल ले जाना चाहिए। मरीज को अनावश्यक रूप से चलने-फिरने से बचाना और सांप के काटे हुए अंग को यथासंभव स्थिर रखना आवश्यक है। सर्पदंश की स्थिति में समय पर चिकित्सा सहायता मिलने से मरीज के उपचार की प्रक्रिया जल्द शुरू की जा सकती है।
लोगों को विशेष रूप से आगाह किया गया कि सांप के काटने के बाद झाड़-फूंक, अंधविश्वास या घरेलू नुस्खों के भरोसे नहीं बैठना चाहिए। किसी भी प्रकार के पारंपरिक उपचार के चक्कर में अस्पताल पहुंचने में देरी नहीं करनी चाहिए। सर्पदंश को गंभीर चिकित्सकीय स्थिति मानते हुए तत्काल चिकित्सा सहायता प्राप्त करना जरूरी है। कार्यक्रम का प्रमुख संदेश यही रहा कि सही समय पर उठाया गया कदम मरीज की जान बचाने में निर्णायक साबित हो सकता है।
जागरूकता कार्यक्रम में सर्पदंश की घटना के दौरान बरती जाने वाली प्राथमिक सावधानियों पर भी ध्यान केंद्रित किया गया। ग्रामीणों को बताया गया कि ऐसी स्थिति में घबराहट के बजाय धैर्य बनाए रखना चाहिए और मरीज को जल्द से जल्द चिकित्सा सुविधा उपलब्ध करानी चाहिए। प्रभावित अंग को स्थिर रखने से अनावश्यक गतिविधि कम करने में मदद मिलती है। साथ ही मरीज को किसी भी प्रकार के खतरनाक घरेलू उपचार से बचाना चाहिए और चिकित्सकीय सलाह को प्राथमिकता देनी चाहिए।
सर्पदंश के मामलों में समय की अहमियत को समझाते हुए लोगों को जागरूक किया गया कि लक्षणों की प्रतीक्षा करने या स्थिति के अपने आप ठीक होने की उम्मीद में उपचार टालना उचित नहीं है। सांप के काटने की आशंका होने पर भी तत्काल चिकित्सकीय जांच कराना जरूरी है। प्रशिक्षित स्वास्थ्यकर्मी मरीज की स्थिति का आकलन कर आवश्यक उपचार तय कर सकते हैं। कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीणों को यह संदेश दिया गया कि सर्पदंश के प्रति जागरूकता और सही प्राथमिक कदम अपनाकर गंभीर परिणामों के जोखिम को कम करने में मदद मिल सकती है।
राजपुर गांव के प्राथमिक विद्यालय में आयोजित इस कार्यक्रम में विद्यार्थियों, शिक्षकों और ग्रामीणों को शामिल कर स्वास्थ्य संबंधी जानकारी समुदाय तक पहुंचाने का प्रयास किया गया। विद्यालय ऐसे कार्यक्रमों के लिए उपयोगी स्थान हैं, जहां बच्चों और शिक्षकों के माध्यम से स्वास्थ्य जागरूकता का संदेश परिवारों तथा आसपास के लोगों तक भी पहुंच सकता है। सर्पदंश जैसी आपात स्थिति के बारे में सही जानकारी होने से लोग समय पर उचित निर्णय ले सकते हैं और मरीज को अस्पताल पहुंचाने में अनावश्यक देरी से बच सकते हैं।
ग्रामीण क्षेत्रों में सांपों से सामना होने की आशंका को देखते हुए सर्पदंश से बचाव और प्राथमिक सावधानियों के बारे में जानकारी होना महत्वपूर्ण है। ऐसे जागरूकता कार्यक्रम लोगों को आपात परिस्थितियों के लिए तैयार करने के साथ स्वास्थ्य सेवाओं के प्रति भरोसा बढ़ाने में भी सहायक होते हैं। विश्वविद्यालय के फॉरेंसिक मेडिसिन एवं टॉक्सिकोलॉजी विभाग की यह पहल लोगों को सर्पदंश से जुड़े जोखिमों और उचित उपचार के महत्व से परिचित कराने की दिशा में महत्वपूर्ण रही।
यूपीयूएमएस सैफई की ओर से सेवा संकल्प अभियान के अंतर्गत आयोजित इस कार्यक्रम ने सामुदायिक स्वास्थ्य जागरूकता और जनकल्याण के महत्व को रेखांकित किया। विश्वविद्यालय का उद्देश्य चिकित्सा संबंधी जानकारी को शैक्षणिक संस्थानों और ग्रामीण समुदायों तक पहुंचाकर लोगों को स्वास्थ्य के प्रति जागरूक बनाना है। सर्पदंश जैसे संवेदनशील विषय पर जानकारी उपलब्ध कराना इसी प्रयास का हिस्सा है, क्योंकि सही प्राथमिक सावधानियां और समय पर उपचार किसी भी आपात स्थिति में महत्वपूर्ण होते हैं।
कुलपति प्रो. डॉ. अजय सिंह के मार्गदर्शन में आयोजित इस कार्यक्रम के माध्यम से ग्रामीणों को अंधविश्वास से दूर रहने, मरीज को शांत रखने, प्रभावित अंग को स्थिर रखने और बिना देरी किए नजदीकी अस्पताल पहुंचाने का संदेश दिया गया। विश्वविद्यालय ने जन-जागरूकता को जीवन रक्षा का प्रभावी माध्यम बताते हुए सुरक्षित एवं स्वस्थ समाज के निर्माण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता व्यक्त की।
कार्यक्रम का मुख्य संदेश रहा कि सर्पदंश की स्थिति में घबराहट और अंधविश्वास के बजाय सही जानकारी, त्वरित निर्णय और चिकित्सकीय सहायता को प्राथमिकता दी जानी चाहिए। लोगों में जागरूकता बढ़ाकर ही सर्पदंश से होने वाले गंभीर नुकसान के जोखिम को कम करने तथा जरूरतमंद मरीजों को समय पर उपचार उपलब्ध कराने की दिशा में प्रभावी कदम उठाए जा सकते हैं।
