नई दिल्ली। केंद्र सरकार देश के हर वर्ग, विशेषकर गरीब और आम नागरिकों को किफायती दरों पर बेहतर यात्रा अनुभव उपलब्ध कराने के लिए निरंतर प्रयासरत है। इसी क्रम में केंद्रीय रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने कहा कि भारतीय रेलवे अब “धीमी प्रगति” से निकलकर “सुपर-फास्ट परिवर्तन” की ओर बढ़ रही है, जो एक नए युग की शुरुआत का संकेत है।
रेल मंत्री ने बताया कि लगभग 1,37,000 किलोमीटर लंबे रेल मार्ग और 25,500 से अधिक ट्रेनों के विशाल नेटवर्क के साथ भारतीय रेलवे देश के कोने-कोने को जोड़ने का काम कर रही है। यह न केवल यात्रियों के आवागमन को आसान बनाती है, बल्कि माल ढुलाई के जरिए अर्थव्यवस्था को मजबूती देने और रोजगार सृजन में भी अहम भूमिका निभा रही है।
उन्होंने कहा कि रेलवे में अधिक नॉन-एसी कोच जोड़कर आम नागरिकों की जरूरतों को प्राथमिकता दी जा रही है, जिससे सस्ती और सुलभ यात्रा सुनिश्चित हो सके। सरकार प्रत्येक यात्री टिकट की लागत का लगभग 45 प्रतिशत हिस्सा स्वयं वहन कर रही है, जिसके चलते भारत में रेल किराया पड़ोसी और विकसित देशों की तुलना में काफी कम बना हुआ है।
कम दूरी की यात्रा को और सुगम बनाने के लिए जल्द ही 200 नई इंटरसिटी ट्रेनें शुरू की जाएंगी। वहीं, मुंबई के उपनगरीय नेटवर्क के लिए स्वचालित दरवाजों से लैस 238 नई लोकल ट्रेनें भी शुरू करने की योजना है, जिससे यात्रियों की सुरक्षा और सुविधा में इजाफा होगा।
रोजगार के क्षेत्र में भी रेलवे का योगदान लगातार बढ़ रहा है। पिछले 10 वर्षों में लगभग 5 लाख नौकरियां सृजित की गई हैं, जबकि बीते दो वर्षों में 1.43 लाख से अधिक सीधी भर्तियां की गई हैं। इसके अलावा, रेलवे की विभिन्न परियोजनाएं लाखों अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर भी पैदा कर रही हैं।
रेलवे स्टेशनों पर बेहतर यात्री सुविधाएं और तकनीक आधारित रखरखाव प्रणाली लागू की जा रही है, जिससे यात्रा अनुभव को नया आयाम मिल रहा है। सरकार का मानना है कि इन सुधारों से भारतीय रेलवे आने वाले समय में और अधिक आधुनिक, सुरक्षित और यात्री-केंद्रित बनकर उभरेगी।
