शुभ्रांत कुमार शुक्ल का जन्म 1 जनवरी 1970 को उत्तर प्रदेश के बहराइच जनपद में हुआ। प्रारम्भिक जीवन से ही वे अध्ययन में अत्यंत मेधावी रहे और समाज के लिए कुछ करने की गहरी इच्छा उनके मन में थी। बचपन में उनका सपना था कि वे एक सैनिक बनकर देश की सेवा करें और राष्ट्र की रक्षा में योगदान दें। समय के साथ उन्होंने उच्च शिक्षा के लिए विज्ञान विषय का चयन किया और भौतिकी में स्नातक की डिग्री डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या से प्राप्त की। उनकी यह शैक्षिक यात्रा आगे चलकर उन्हें वैज्ञानिक दृष्टिकोण और तार्किक सोच प्रदान करने का आधार बनी, जिसने उनके प्रशासनिक जीवन में निर्णय क्षमता को और अधिक सशक्त बनाया।
अपनी मेहनत और लगन से वे 1997 में उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग में चयनित हुए। यह उनके जीवन का एक महत्वपूर्ण पड़ाव था क्योंकि यहीं से उनकी प्रशासनिक यात्रा शुरू हुई। शुरुआती दौर में उन्होंने विभिन्न पदों पर कार्य करते हुए जनता के बीच जाकर उनकी समस्याओं को समझा और समाधान के लिए प्रयास किए। उनके व्यक्तित्व में अनुशासन, संवेदनशीलता और कार्य के प्रति निष्ठा साफ झलकती थी, जिसने उन्हें जल्द ही एक लोकप्रिय अधिकारी के रूप में स्थापित किया।
वर्ष 2013 उनके लिए विशेष महत्व रखता है क्योंकि इसी वर्ष उन्हें भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) में पदोन्नति मिली। प्रमोशन के बाद उनकी जिम्मेदारियाँ और बढ़ीं और राज्य सरकार ने उन्हें कई महत्वपूर्ण दायित्व सौंपे। उनका गृह जनपद बहराइच होने के बावजूद वे जिस भी जिले में गए, वहाँ की जनता ने उन्हें अपनेपन के साथ स्वीकार किया क्योंकि वे हमेशा समस्याओं को अपना मानकर समाधान की ओर अग्रसर होते रहें।
4 मार्च 2021 को वे चित्रकूट के जिलाधिकारी बनाए गए। इस अवधि में कोविड-19 के बाद की पुनर्बहाली, आपदा प्रबंधन, राजस्व न्याय और बुनियादी सेवाओं की सुचारुता जैसे विषयों पर उन्होंने विशेष जोर दिया। वे लगातार फील्ड विज़िट करते और सरकारी योजनाओं की जमीनी हकीकत को परखते। उनकी यही कार्यशैली उन्हें आम जनता के बीच भरोसेमंद और सक्रिय प्रशासक के रूप में पहचान दिलाती रही।
जुलाई 2022 में चित्रकूट जिले के रौली कल्याणपुर ग्राम में एक भीषण हादसा हुआ जब एक तेज रफ्तार ट्रक ने सड़क किनारे सो रहे छह लोगों को कुचल दिया। घटना की गंभीरता को देखते हुए DM शुभ्रांत कुमार शुक्ल तत्काल मौके पर पहुँचे। उन्होंने घायलों को अस्पताल पहुँचवाया, मृतकों के परिजनों से मुलाकात कर सांत्वना दी और आर्थिक सहायता की घोषणा की। वाहन जब्त कर चालक को गिरफ्तार कराया गया। उन्होंने मृतकों के परिजनों को ₹2 लाख और घायलों को ₹50,000 की सहायता उपलब्ध कराई। इस संवेदनशील पहल ने यह साबित कर दिया कि वे न केवल प्रशासनिक अधिकारी हैं बल्कि मानवीय संवेदनाओं को भी प्राथमिकता देते हैं।
चित्रकूट के बाद उन्हें कन्नौज का जिलाधिकारी बनाया गया, जहाँ उनका कार्यकाल लगभग ढाई वर्ष का रहा। इस दौरान उन्होंने जिले की दशकों पुरानी समस्याओं को हल करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। विशेष रूप से 1990 में लगी आग से नष्ट हुए भूमि रिकॉर्ड का मामला 33 वर्षों तक अनसुलझा रहा था, जिससे हजारों किसान सरकारी योजनाओं, ऋण और संपत्ति हस्तांतरण से वंचित रहे। इस समस्या को उन्होंने प्राथमिकता दी और व्यापक सर्वेक्षण कराकर समाधान निकाला।
उनके आदेश पर पुराने दस्तावेज़ों की मदद से भूमि अभिलेखों को पुनः तैयार किया गया और नंदलालपुर सहित 35 गाँवों के किसानों को नई खतौनियाँ जारी की गईं। इससे 212 किसानों को तुरंत लाभ मिला और वे बैंक से ऋण, पीएम किसान सम्मान निधि, बीमा जैसी योजनाओं से जुड़ सके। दशकों से उपेक्षित इन परिवारों के जीवन में यह ऐतिहासिक बदलाव था और प्रशासनिक इतिहास में इसे एक उल्लेखनीय उपलब्धि माना गया।
अप्रैल 2025 में शुभ्रांत कुमार शुक्ल ने इटावा जिले के जिलाधिकारी के रूप में पदभार ग्रहण किया। यह नियुक्ति उनके लिए एक नई चुनौती थी क्योंकि इटावा सामाजिक और राजनीतिक रूप से संवेदनशील जिला माना जाता है। यहाँ प्रशासनिक दक्षता के साथ-साथ संतुलित और त्वरित निर्णय क्षमता की आवश्यकता थी। उन्होंने पदभार ग्रहण करने के तुरंत बाद जिले की प्राथमिकताओं की समीक्षा की और विभागीय अधिकारियों के साथ रणनीति बनाई।
पदभार ग्रहण करने के कुछ दिनों बाद ही महेवा ब्लॉक के दादरपुर गाँव में एक बड़ी घटना हुई, जिसे राष्ट्रीय स्तर के मीडिया हाउस ने प्राइम टाइम में लगातार जगह दी। विपक्षी राजनीतिक दलों ने इसे बड़ा मुद्दा बनाकर सरकार और प्रशासन को घेरने का प्रयास किया। परंतु एक कुशल प्रशासक के रूप में शुभ्रांत कुमार शुक्ल ने स्थिति को शांत और संयमित ढंग से संभाला। उन्होंने न केवल मौके पर जाकर घटनाओं की वास्तविकता जानी बल्कि त्वरित और निष्पक्ष कार्रवाई भी की।
इस पूरी प्रक्रिया में उनकी त्वरित निर्णय क्षमता और संतुलित रवैये ने माहौल को बिगड़ने से बचा लिया। विपक्षी पार्टियाँ भी उन पर कोई आरोप नहीं लगा सकीं। यह घटना इस बात का प्रमाण है कि शुभ्रांत कुमार शुक्ल केवल प्रशासनिक नियमों के अधिकारी नहीं हैं बल्कि एक संवेदनशील और दूरदर्शी नेता भी हैं। उनकी प्रशासनिक यात्रा यह दर्शाती है कि यदि अधिकारी ईमानदारी और संवेदनशीलता के साथ काम करें तो जनता का विश्वास जीतना कठिन नहीं है।
शुभ्रांत कुमार शुक्ल एक बेहतरीन टीम लीडर के रूप में जाने जाते हैं। वे अपने अधिनस्थ अधिकारियों और कर्मचारियों को सदैव प्रेरित और प्रोत्साहित करते हैं ताकि वे अपने कार्यों में उच्चतम दक्षता और समर्पण के साथ योगदान दे सकें। उनका सहयोगी स्वभाव और मार्गदर्शन अधीनस्थों को न केवल अपार सम्मान प्रदान करता है बल्कि उनमें आत्मविश्वास भी भरता है। उनके नेतृत्व में टीम ने कई बार आपातकालीन परिस्थितियों का सफलतापूर्वक सामना किया है और महत्वपूर्ण कार्यों को समय पर पूरा कर प्रशासन की विश्वसनीयता को और सुदृढ़ किया है।
जिलाधिकारी इटावा से आप प्रत्येक कार्य दिवस में सुबह 10 बजे से 12 बजे तक इटावा कलेक्टरेट स्थित कार्यालय में मिल सकते है। उनका सीयूजी मो 9454417551 एवं ईमेल आईडी – dmetw@nic.in है