होली आपसी सौहार्द और भाईचारे को मजबूत करने वाला त्योहार है, जो स्वतंत्रता संग्राम और संविधान के मूलमंत्र का प्रतीक है। हिंदू, मुस्लिम, सिख, ईसाई—हम सभी भाई-भाई हैं। इसी विचार के साथ वरिष्ठ वामपंथी नेता और उत्तर प्रदेश किसान सभा के महामंत्री मुकुट सिंह ने भैसरई (जसवंतनगर) में आयोजित किसान सभा की क्षेत्रीय कमेटी की बैठक को संबोधित किया। बैठक की अध्यक्षता जबर सिंह शाक्य ने की, जबकि संचालन जिला संयुक्त मंत्री संतोष राजपूत ने किया।
बैठक में किसानों और मजदूरों की समस्याओं को लेकर गहरी चिंता व्यक्त की गई। मुकुट सिंह ने कहा कि आज किसान-मजदूर और आमजन बिजली निजीकरण, महंगाई, बेरोजगारी और कृषि नीति जैसी प्राणलेवा समस्याओं से जूझ रहे हैं। उन्होंने आरोप लगाया कि मोदी सरकार अडानी स्मार्ट मीटर योजना के जरिए जनता पर आर्थिक बोझ डाल रही है और कृषि बाजार नीति के माध्यम से वापस लिए गए काले कृषि कानूनों को चोर दरवाजे से फिर लागू करने की साजिश कर रही है।
उन्होंने कहा कि एमएसपी की गारंटी, कर्जमाफी, बिजली निजीकरण और महंगे बिलों को वापस लेने के जो वादे मोदी सरकार ने किए थे, वे अब पूरे नहीं किए जा रहे हैं। उत्तर प्रदेश में बिजली के निजीकरण की घोषणा और स्मार्ट मीटर आम जनता के लिए गले का फंदा बनने जा रहे हैं। इससे आम नागरिकों की परेशानियां और बढ़ेंगी, जबकि बड़े पूंजीपतियों को फायदा पहुंचाया जाएगा।
किसान नेता ने कहा कि देश में संविधान और लोकतंत्र खतरे में है और सच बोलने वालों पर अत्याचार हो रहा है। उन्होंने सीतापुर में पत्रकार की निर्मम हत्या का जिक्र करते हुए कहा कि यह लोकतांत्रिक स्वतंत्रता पर हमला है। उन्होंने किसानों से अपील की कि वे सरकार की नीतियों के खिलाफ संगठित होकर संघर्ष करें और अधिक से अधिक संख्या में किसान सभा से जुड़ें।
बैठक में तय किया गया कि जिला कचहरी पर प्रदर्शन कर सरकार की जनविरोधी नीतियों का विरोध किया जाएगा और किसानों की स्थानीय मांगों को उठाया जाएगा। उन्होंने कहा कि किसान सभा हमेशा किसानों और मजदूरों के हितों के लिए संघर्ष करती रहेगी और किसी भी प्रकार की शोषणकारी नीतियों को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।
बैठक में बड़ी संख्या में किसान एवं मजदूर उपस्थित रहे, जिन्होंने सरकार की नीतियों के खिलाफ आवाज उठाने का संकल्प लिया। किसान सभा के पदाधिकारियों ने कहा कि आने वाले दिनों में संघर्ष और तेज किया जाएगा, ताकि किसानों और आम जनता के हक की लड़ाई को निर्णायक मोड़ दिया जा सके।