इटावा के छोटे से बीहड़ी गांव मड़ैया अजबपुर की रहने वाली वंदना यादव, इस बात का जीता-जागता उदाहरण हैं कि बेटियां किसी से कम नहीं होतीं। 24 जून 2000 को जन्मी वंदना ने अपने परिवार और समाज के लिए कुछ खास किया है। उनकी यह यात्रा साधारण नहीं, बल्कि कड़ी मेहनत, समर्पण और परिवार के आशीर्वाद से प्रेरित है।
वंदना के पिता, रूकुमपाल सिंह यादव, और माँ, सुनीता देवी, ने उन्हें बचपन से ही यह सिखाया कि अपने सपनों को पूरा करने के लिए कोई भी बाधा बहुत बड़ी नहीं होती। उनके परिवार ने वंदना को हर कदम पर सहयोग दिया, और आज वह जिस मुकाम पर हैं, उसके पीछे उनके माता-पिता की शानदार परवरिश और आशीर्वाद का बड़ा योगदान है। वंदना अपने पूरे परिवार के लिए बेहद खास हैं, और उनका मानना है कि उनके जीवन में सबसे महत्वपूर्ण स्थान उनके माता-पिता और परिवार का है।
शिक्षा के क्षेत्र में वंदना ने हमेशा उत्कृष्ट प्रदर्शन किया। उन्होंने अपनी स्नातक शिक्षा पूरी करने के बाद पत्रकारिता में अपना करियर बनाने का निर्णय लिया। इसके लिए उन्होंने मास कम्युनिकेशन में डिग्री प्राप्त की, जिससे उन्हें पत्रकारिता की बारीकियों को समझने और इसे एक पेशे के रूप में अपनाने का मौका मिला। पत्रकारिता के क्षेत्र में कदम रखते हुए, वंदना ने न केवल अपने परिवार का नाम रोशन किया, बल्कि उन बेटियों के लिए एक मिसाल भी कायम की जो बड़े सपने देखने की हिम्मत रखती हैं।
वंदना यादव ने अपनी मेहनत और लगन से पत्रकारिता में एक विशेष स्थान बनाया है। वंदना ने अपने करियर की शुरुआत आप अभी तक न्यूज पेपर से की, जिसमें उन्हें रंजीत यादव का महत्वपूर्ण सहयोग मिला। पत्रकारिता के प्रति अपने जुनून और कड़ी मेहनत से वंदना ने अपनी पहचान बनाई।
2022 में, वंदना ने इंडिया न्यूज़ के इटावा संवाददाता सौरभ सिंह के साथ मिलकर भारत वाणी नेशनल न्यूज़ की स्थापना की। यह वंदना की पेशेवर ज़िन्दगी का एक महत्वपूर्ण पड़ाव था। उन्होंने अपनी मेहनत और कौशल के दम पर भारत वाणी नेशनल को एक नई पहचान दिलाई और उसे एक महत्वपूर्ण डिजिटल न्यूज़ प्लेटफ़ॉर्म में बदल दिया।
वंदना की पत्रकारिता की सबसे बड़ी खासियत यह है कि वह हमेशा फ़ील्ड में रहकर रिपोर्टिंग करती हैं। जहां कई पत्रकार अपने कार्यालयों से काम करना पसंद करते हैं, वहीं वंदना हर समय जमीन से जुड़े मुद्दों की पड़ताल करती हैं। वह उन स्थानों पर जाती हैं जहाँ खबरें जन्म लेती हैं, चाहे वह ग्रामीण इलाकों की समस्याएँ हों, राजनीतिक गतिविधियाँ हों या फिर सामाजिक आंदोलन। उनका मानना है कि सच्ची पत्रकारिता वही है जो सीधे घटनास्थल पर जाकर हकीकत को सामने लाए, और इसी वजह से उनकी रिपोर्टिंग में गहरी प्रामाणिकता और सटीकता होती है।
फ़ील्ड में रहकर काम करना एक पत्रकार के लिए हमेशा आसान नहीं होता। इसमें जोखिम, असुविधाएं और कई तरह की चुनौतियाँ आती हैं, लेकिन वंदना ने इन चुनौतियों का सामना करने से कभी पीछे नहीं हटीं। उन्होंने एक लड़की होते हुए भी उन परिस्थितियों में काम किया, जहाँ कभी-कभी पुरुष पत्रकारों के लिए भी कठिनाई होती है। वंदना की इस मेहनत और जज़्बे ने उन्हें इटावा के पत्रकारिता जगत में एक अलग पहचान दिलाई है।
वंदना न सिर्फ एक सफल पत्रकार हैं, बल्कि समाज के प्रति उनका योगदान भी उल्लेखनीय है। उन्होंने विभिन्न सामाजिक संगठनों के साथ मिलकर समाज सेवा में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। उनकी समाजसेवा के प्रयासों ने उन्हें कई संगठनों द्वारा सम्मानित भी किया है। वंदना का मानना है कि समाज के कमजोर और वंचित वर्गों की मदद करना हर व्यक्ति की जिम्मेदारी है, और वह इस दिशा में निरंतर प्रयासरत हैं।
वंदना यादव एक ऐसी पत्रकार हैं, जिन्होंने पत्रकारिता के माध्यम से न सिर्फ जनता को सच्चाई से अवगत कराया, बल्कि उन्हें जागरूक करने का महत्वपूर्ण कार्य भी किया है। उनकी रिपोर्टिंग का हर पहलू उनके समर्पण और सच्चाई के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को दर्शाता है। इटावा से अपने सफर की शुरुआत करने वाली वंदना ने विभिन्न सामाजिक और राजनीतिक मुद्दों पर बेहतरीन रिपोर्टिंग के जरिए अपना लोहा मनवाया है।
समाजवादी पार्टी के संस्थापक और उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री स्वर्गीय मुलायम सिंह यादव के देहावसान पर वंदना यादव की रिपोर्टिंग ने पत्रकारिता के उच्च मानकों को छुआ। वंदना ने मुलायम सिंह यादव के देहावसान पर जनता, राजनीतिक सहयोगियों, और विरोधियों की प्रतिक्रियाओं को न केवल इकट्ठा किया, बल्कि उन्हें समाज के विभिन्न तबकों के नजरिए से विश्लेषित भी किया। उनकी रिपोर्ट में यह साफ दिखाई दिया कि मुलायम सिंह का प्रभाव कितना व्यापक था, और कैसे उन्होंने देशभर के गरीब और हाशिए पर खड़े लोगों की आवाज़ बनकर समाजवादी आंदोलन को सशक्त किया।
वंदना यादव ने अपनी उत्कृष्ट रिपोर्टिंग और समाज के प्रति गहरी संवेदनशीलता से पत्रकारिता में एक मजबूत स्थान बनाया है। उनकी रिपोर्टिंग ने न केवल घटनाओं को प्रस्तुत किया, बल्कि उनके पीछे की सच्चाई और मुद्दों की जड़ों को भी जनता के सामने लाया। वंदना ने पत्रकारिता के उस उच्च आदर्श को जीवित रखा है, जिसमें सच्चाई को सामने लाना और समाज को जागरूक करना प्रमुख उद्देश्य होते हैं।