हमारा इटावा
पिलुवा महावीर मंदिर – बालरूप में लेटी हुई है हनुमान जी की प्रतिमा
इटावा शहर से लगभग 8 किमी दूर पश्िचम की ओर कचौरा घाट रोड पर यमुना नदी के किनारे रूरा गांव के पास दक्षिण मुखी...
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टिक्सी महादेव मंदिर : लोक मानव की असीम श्रद्धा का केन्द्र
टिक्सी महादेव लोक मानव की असीम श्रद्धा का केन्द्र है। इटावा के इस सुविख्यात मंदिर को टिक्सी नाम से पुकारे जाने के सम्बन्ध मे...
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ब्राह्मणी देवी- आस्था का केंद्र है प्राचीन मंदिर
इटावा मुख्यालय से 15 किलोमीटर पश्िचम दक्षिण में बलरई में रेलवे स्टेशन से 5 किलोमीटर दूर पर स्िथत है ब्राह्मणी देवी का मंदिर। मारकण्डेय...
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भारेश्वर मंदिर – जनपद का सबसे विशाल और प्राचीन मंदिर दूसरा नहीं
भरेह का इतिहास तो बक्त के पंछियों सा उड़ गया लेकिन अपने पद चिन्ह यहां के भारेश्वर मंदिर और किले के अवशेषों के रूप ...
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जैन मूर्तिकला का असुरक्षित संग्रहालय जैसा है आसई
आसई को आशानगरी भी कहा जाती है। आसई का अस्ितत्व बस्तुत: इटावा की प्राचीनता का द्योतक है। यमुना के बीहड़ों को काटकर बनाई गई...
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दिलों पर राज करती है जनपद प्रदर्शनी, फुव्वारा है ‘हृदय स्थल’ यहां होता है बिछड़ों का मिलन
शताब्दी वर्ष भी मना चुकी है प्रदर्शनी
इटावा जनपद की संस्कृति से जुड़ी जनपद प्रदर्शनी अपने जीवन के एक सौ वर्ष पूरे कर चुकी है।...
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केन्द्रीय विद्यालय खुलना जिले की सबसे बड़ी उपलब्धि
वर्तमान में जिले मे हर गांव में प्राइमरी पाठशाला, जूनियर हाईस्कूल, उच्चतर माध्यमिक विद्यालय, इण्टरमीडिएट वित्त विहीन हाईस्कूल/इण्टर, वित्त विहीन डिग्री कॉलेज,संस्कृत के कई...
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अर्जुन सिंह भदौरिया ने किया ‘लाल सेना’ का गठन
जिले में अर्जुन सिहं भदौरिया ने गांवों के लोगों को संगठित कर सशस्त्र लाल सेना बनाकर क्रान्ित के लिये पूर्ण तैयारी कर ली थी।...
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इटावा में तहसील पर तिरंगा और जवाब में गोली के शिकार बने छह लोग
इतिहास की कुछ तारीखें केवल बीते समय की याद नहीं होतीं, वे आज भी दिलों को झकझोर देती हैं। ऐसी ही एक तारीख पर...
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गोलियां चलती रहीं, ‘वंदे मातरम्’ गूंजता रहा: इटावा के तीन अमर शहीदों की शौर्य गाथा
31 मार्च 1931 की वह सुबह ताखा क्षेत्र के लिए किसी उत्सव से कम नहीं थी। नगला ढकाऊ की गलियों में खुशियों की लहर...
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जब नेहरू और गांधी आंदोलन को गति देने इटावा आये
स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इटावा और इटावा मुख्य कस्वों मे पूरी तरह हड़ताल रही। पुलिस ने जुलूसों पर डण्डे बरसाये। इसी समय पं0 जवाहर...
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काकोरी कांड में गिरफतार हुये ज्योति शंकर दीक्षित और मुकुन्दीलाल
क्रान्ितकारियों ने अपना कार्यक्रम शुरू कर दिया और राजनैतिक डकैतियों का सिलसिला जारी हुआ । 9 अगस्त सन् 1925 को काकोरी कांड के रूप...
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जब अंग्रेज युवराज के तमगे लेने से इंकार किया डी0बी0ए0 स्कूल के छात्रों ने
31 जुलाई 1921 ई0 को बम्बई में इंग्लैण्ड के युवराज के आने की खुशी में छात्रों को तमगे बांटे गये किन्तु इटावा के डी0ए0बी0...
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जब कांग्रेस संस्थापक ए.ओ. ह्यूम महिला भेष में भागे इटावा से
ए.ओ. ह्यूम, भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस के संस्थापक और ब्रिटिश प्रशासक, का जीवन भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के शुरुआती दौर की घटनाओं से गहराई से जुड़ा...
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जब अंग्रेजों ने इटावा छोड़ने का फरमान दिया
इस बीच ह्यूम ने एक और दूरदर्शी कार्य किया था। उन्होंने इटावा में स्िथत खजाने का एक बड़ा भाग आगरा भेज दिया था तथा...
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इटावा में 19 मई 1857 को विद्रोह, बलैया मंदिर पर अग्रेजो और विद्रोहियों में मुठभेड़
19 मई 1857 की वह सुबह इटावा की धरती के लिए साधारण नहीं थी। आगरा रोड पर जसवंतनगर स्थित बलैया मंदिर के आसपास हवा...
