इटावा। शारदीय नवरात्रि में बालिकाओं की प्रतिभा, आत्मविश्वास और नेतृत्व क्षमता को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से मिशन शक्ति के तहत शिक्षा विभाग में अनूठी पहल की गई। ताखा क्षेत्र के पीएम श्री विद्यालय समथर में कक्षा सात की छात्रा दुर्गा को एक दिन के लिए खंड शिक्षा अधिकारी बनाया गया। जिम्मेदारी मिलते ही दुर्गा ने इसे गंभीरता से निभाया और खंड शिक्षा अधिकारी की गाड़ी से करीब सात किलोमीटर दूर स्थित मामन गांव के प्राथमिक विद्यालय तथा उच्च प्राथमिक विद्यालय का निरीक्षण करने पहुंच गईं। इस दौरान उन्होंने मध्याह्न भोजन (एमडीएम), बच्चों की शैक्षिक गुणवत्ता, उपस्थिति और विद्यालयों की व्यवस्थाओं का जायजा लिया। साथ ही शौचालयों की नियमित साफ-सफाई सुनिश्चित कराने के निर्देश भी दिए।

ताखा के खंड शिक्षा अधिकारी अनुपम शुक्ला ने मिशन शक्ति के अंतर्गत छात्रा दुर्गा को एक दिन के लिए अपने पद की जिम्मेदारी सौंपी। उन्होंने दुर्गा को बुके देकर स्वागत किया और स्मृति चिह्न भेंट किया। इसके बाद दुर्गा ने खंड शिक्षा अधिकारी के रूप में विद्यालयों का निरीक्षण शुरू किया। एक दिन के लिए अधिकारी की भूमिका निभाते हुए उन्होंने शिक्षण व्यवस्था को करीब से समझा और विद्यालयों में बच्चों को दी जा रही शिक्षा की गुणवत्ता को परखने का प्रयास किया। इस पहल के माध्यम से छात्राओं को प्रशासनिक जिम्मेदारियों का अनुभव देने के साथ उनमें नेतृत्व क्षमता और निर्णय लेने का आत्मविश्वास विकसित करने का संदेश दिया गया।
दुर्गा सबसे पहले प्राथमिक विद्यालय मामन पहुंचीं। यहां निरीक्षण के दौरान उन्होंने एक दिन के लिए प्रधानाध्यापिका की जिम्मेदारी निभा रहीं मनीषा से नवीन नामांकन के संबंध में जानकारी ली। इसके बाद वह कक्षाओं में पहुंचीं और बच्चों से सीधे संवाद किया। उन्होंने विद्यार्थियों से गणित के सवाल पूछकर उनकी समझ और पढ़ाई के स्तर को परखा। कक्षा में बच्चों से प्रश्न पूछने की इस प्रक्रिया के माध्यम से उन्होंने यह जानने का प्रयास किया कि विद्यार्थियों को पढ़ाए जा रहे विषयों की कितनी जानकारी है। निरीक्षण के दौरान विद्यालय की शैक्षिक गतिविधियों और बच्चों की पढ़ाई पर विशेष ध्यान दिया गया।
इसके बाद दुर्गा ने उच्च प्राथमिक विद्यालय मामन का निरीक्षण किया। यहां एक दिन के लिए प्रधानाध्यापिका की जिम्मेदारी संभाल रहीं दीक्षा ने उन्हें स्मार्ट क्लास दिखाई। विद्यालय में कुल 87 छात्र-छात्राओं के सापेक्ष 83 विद्यार्थी उपस्थित मिले। दुर्गा ने बच्चों से सामान्य ज्ञान से जुड़े प्रश्न पूछे। विद्यार्थियों ने प्रश्नों के सही उत्तर दिए तो उन्होंने बच्चों को पुरस्कृत कर उनका उत्साहवर्धन किया। इस दौरान विद्यालय में उपलब्ध शिक्षण सुविधाओं और बच्चों की शैक्षिक गतिविधियों का जायजा लिया गया। निरीक्षण के दौरान एमडीएम व्यवस्था तथा विद्यालय परिसर में साफ-सफाई पर भी ध्यान दिया गया।
खंड शिक्षा अधिकारी की भूमिका में दुर्गा ने विद्यालयों में स्वच्छता बनाए रखने की आवश्यकता पर भी जोर दिया। उन्होंने शौचालयों की नियमित साफ-सफाई कराने के निर्देश दिए, ताकि बच्चों को विद्यालय में स्वच्छ वातावरण मिल सके। मिशन शक्ति के तहत छात्रा को एक दिन के लिए अधिकारी बनाकर विद्यालयों का निरीक्षण कराना बालिकाओं को शिक्षा व्यवस्था, प्रशासनिक कार्यप्रणाली और जिम्मेदारियों से परिचित कराने की पहल के रूप में देखा गया। इससे छात्राओं को यह समझने का अवसर मिला कि किसी संस्थान के संचालन में अनुशासन, जवाबदेही, नियमित निरीक्षण और विद्यार्थियों की शैक्षिक प्रगति कितनी महत्वपूर्ण होती है।
इसी क्रम में पीएम श्री कंपोजिट विद्यालय समथर में कक्षा आठ की छात्रा गुंजन को एक दिन के लिए प्रधानाध्यापक की जिम्मेदारी सौंपी गई। विद्यालय के प्रधानाध्यापक अनिल दुबे ने नई प्रधानाध्यापिका की भूमिका निभा रहीं गुंजन को प्रतीक चिह्न देकर स्वागत किया। इस गतिविधि के माध्यम से छात्रा को विद्यालय संचालन और प्रधानाध्यापक के दायित्वों को समझने का अवसर मिला। वहीं कंपोजिट विद्यालय बकौली में कक्षा आठ की छात्रा प्रतिज्ञा को एक दिन के लिए प्रधानाध्यापक की जिम्मेदारी दी गई।
कंपोजिट विद्यालय बकौली में छात्राओं और विद्यार्थियों को अलग-अलग शैक्षिक जिम्मेदारियां भी सौंपी गईं। विशाल, सरस्वती, पल्लवी, मोहिनी, ऋषि, वैशाली, अनुष्का और सृष्टि को एक दिन के लिए कक्षा अध्यापक की जिम्मेदारी दी गई। इस प्रकार मिशन शक्ति के अंतर्गत विभिन्न विद्यालयों में छात्राओं को अधिकारी, प्रधानाध्यापक और कक्षा अध्यापक की भूमिकाएं देकर उनमें नेतृत्व, आत्मविश्वास और जिम्मेदारी की भावना विकसित करने का प्रयास किया गया।
नवरात्रि के दौरान आयोजित इस पहल का उद्देश्य बालिकाओं को केवल शिक्षा तक सीमित न रखकर उन्हें निर्णय लेने, नेतृत्व करने और समाज में अपनी भूमिका पहचानने के लिए प्रेरित करना है। दुर्गा द्वारा खंड शिक्षा अधिकारी की भूमिका में मामन के दोनों विद्यालयों का निरीक्षण करना इस बात का उदाहरण रहा कि अवसर मिलने पर छात्राएं जिम्मेदारी निभाने और व्यवस्थाओं को समझने के लिए आगे आ सकती हैं। मिशन शक्ति के तहत इस तरह की गतिविधियां बालिकाओं में आत्मविश्वास बढ़ाने के साथ उन्हें भविष्य में विभिन्न प्रशासनिक और सामाजिक दायित्व निभाने के लिए प्रेरित करने का माध्यम बन रही हैं।
