थाने में तैनात पुलिसकर्मियों को बाल अपराध और किशोर न्याय से संबंधित मामलों में जागरूक करने के उद्देश्य से जुवेनाइल जस्टिस एक्ट का विशेष प्रशिक्षण दिया गया। इस प्रशिक्षण सत्र में बाल संरक्षण अधिकारी सोहन गुप्ता ने पुलिसकर्मियों को जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की विस्तृत जानकारी दी और इसमें हुए संशोधनों पर प्रकाश डाला।
प्रशिक्षण के दौरान सोहन गुप्ता ने निर्भया कांड से लेकर जुवेनाइल जस्टिस एक्ट में हुए बदलावों को समझाया और बताया कि बच्चों से संबंधित मामलों में पुलिस को किस तरह से कार्य करना चाहिए। उन्होंने निर्धारित प्रारूपों को भरने की प्रक्रिया भी सिखाई ताकि पुलिसकर्मी कानूनी प्रक्रिया को सही तरीके से पूरा कर सकें। उन्होंने यह भी निर्देश दिया कि बच्चों को न्यायपीठ बाल कल्याण समिति या किशोर न्याय बोर्ड में पेश करते समय पुलिसकर्मियों को वर्दी न पहनकर सादी ड्रेस में रहना चाहिए, ताकि बच्चों में भय की भावना उत्पन्न न हो।
इसके अलावा, उन्होंने राजकीय बाल संरक्षण गृह बालक एवं राजकीय बाल संरक्षण गृह बालिका की कार्यप्रणाली के बारे में भी विस्तार से बताया। इस प्रशिक्षण सत्र का उद्देश्य पुलिसकर्मियों को बच्चों के प्रति संवेदनशील बनाना और उन्हें कानूनी प्रक्रियाओं की सही समझ प्रदान करना था।
इस मौके पर इंस्पेक्टर राजेंद्र विक्रम सिंह, एएचटीयू प्रभारी दिवाकर सरोज, बाल संरक्षण विशेषज्ञ प्रेम कुमार शाक्य, थाने के उपनिरीक्षक और अन्य पुलिसकर्मी उपस्थित रहे। प्रशिक्षण के दौरान सभी अधिकारियों ने जुवेनाइल जस्टिस एक्ट की बारीकियों को समझा और इसे अपने कार्यों में प्रभावी रूप से लागू करने का संकल्प लिया।