Friday, April 4, 2025

15 वीं शताव्दी में इटावा

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इस शताव्दी में जोनपुर के शासको ओर दिल्ली सिहासन के विभिन्न अभिलाषियो के बीच बराबर संघर्ष होते रहे इटावा जिलो दोनों राज्यों की सीमा पर था अतः दोनों के आक्रमण का शिकार हुआ

सन् १४०० ई० में इकबाल खान सूबा हिंद की ओर बड़ा ओर पटियाली (जिला एटा) के समीप काली नदी के किनारे चकरनगर के राव सूरसेन तथा अन्य हिंदू सरदारों से युद्ध किया इस युद्ध में हिंदू सरदार पराजित हुएऔर इटावा की ओर भाग आये बहुत से लोग मरे गए और बहुत से बंदी बनाये गए और फिर इकबाल खान कन्नौज गया जहाँ जून पुर के सुल्तान मुबारक शाह ने उसका सामना किया दो मास तद गंगा के चरों ओर मोर्चा पड़ा रहा किन्तु किसी का भी एक दूसरे   पर आक्रमण करने का सहस न हुआ ओर अन्त में दोनों अपने अपने घर को वापस चले गए

सन् १४०१ ई० में सुल्तान महमूद जो तेमूर के आक्रमण के भय से दिल्ली छोड़कर धार (मालवा प्रान्त) चला गया था पुनः दिल्ली लौट आया इकबाल खान ने मस्का स्वागत किया ओर मसे कन्नौज ले गए एसी बीच में मुबारक का भाई इब्राहीम शाह शर्की (सन् १४०० ई० से १४३६ ई०) जौनपुर का स्वामी बन चुका था इसने जब कन्नौज में इकबाल खान के आने का समाचार सुना तो अपनी सेना एकत्रित कर युद्ध के लिए तैयार हुआ जब युद्ध की सारी तैयारी हो चुकी तो सुल्तान महमूद इकबाल खान का पक्ष छोड़ दिया ओर इब्राहीम के पक्ष में लामिला किन्तु जब इब्राहीम ने उसके इस कार्य की प्रशंसा की तो वह कन्नौज की ओर गया ओर किले पर अपना अधिकार जमा लिया

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Ashish Bajpai
Ashish Bajpaihttps://etawahlive.com/
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