निवाड़ीकला। क्षेत्र के ग्राम जगमोहनपुर भिटारा में चल रही श्रीमद्भागवत कथा के तीसरे दिन कथा वाचक ने भक्तों को ध्रुव चरित्र और सती चरित्र का प्रसंग सुनाया। कथा वाचक ने दोनों प्रसंगों के माध्यम से जीवन के महत्वपूर्ण सिद्धांतों को प्रस्तुत किया।
ध्रुव चरित्र में भगवान ने भक्त की तपस्या से प्रसन्न होकर उसे वरदान देने की कथा सुनाई। आचार्य ने बताया कि ध्रुव, जो सौतेली मां से अपमानित हुआ था, उसने कठोर तपस्या करने का निर्णय लिया। वह बिना किसी भय के जंगल की ओर चल पड़ा, जहां बारिश, आंधी और तूफान ने उसे परेशान किया, लेकिन ध्रुव ने तपस्या में कोई कमी नहीं आने दी। उसकी भक्ति और समर्पण को देखकर भगवान ने उसकी तपस्या से प्रसन्न होकर उसे अटल पदवी दी।
इस कथा का उद्देश्य दर्शकों को धैर्य, संघर्ष और विश्वास के महत्व को समझाना था। आचार्य ने कहा कि जीवन में कठिनाइयाँ आना स्वाभाविक है, लेकिन अगर हमारी नीयत सच्ची हो, तो भगवान हमारी मेहनत को पहचानते हैं और हमारी सहायता करते हैं।