उत्तर प्रदेश आयुर्विज्ञान विश्वविद्यालय, सैफई के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग द्वारा एनएचएम कार्यक्रम के तहत 12 दिवसीय मिनी लैप प्रशिक्षण सह कार्यशाला का आयोजन किया गया। यह कार्यशाला सिफ्सा परियोजना के अंतर्गत संपन्न हुई, जिसमें निकटवर्ती सामुदायिक चिकित्सा केंद्रों (सीएचसी) के चिकित्सा अधिकारियों को मिनी लैप नसबंदी तकनीक की विस्तृत जानकारी दी गई। प्रशिक्षण का संचालन विभाग की विभागाध्यक्ष एवं मुख्य नोडल अधिकारी प्रो. (डा.) कल्पना कुमारी, नोडल अधिकारी डा. प्रगति द्विवेदी एवं डा. शाहीन बानो द्वारा किया गया। इस दौरान विशेषज्ञों ने परिवार नियोजन के विभिन्न विकल्पों पर भी प्रकाश डाला।
कार्यशाला का शुभारंभ विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो. डा. पी.के. जैन ने दीप प्रज्ज्वलित कर किया। इस 12 दिवसीय प्रशिक्षण के समापन अवसर पर कुलसचिव डा. चंद्रवीर सिंह, चिकित्सा अधीक्षक डा. आई.के. शर्मा और स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग की विभागाध्यक्ष डा. कल्पना कुमारी ने प्रशिक्षण में भाग लेने वाले चिकित्सा अधिकारियों को प्रमाण-पत्र देकर सम्मानित किया। इस अवसर पर डा. प्रगति द्विवेदी, डा. शाहीन बानो सहित विभाग के कई वरिष्ठ फैकल्टी मेंबर्स एवं रेजिडेंट डॉक्टर उपस्थित रहे।
मुख्य नोडल अधिकारी एवं विभागाध्यक्ष डा. कल्पना कुमारी ने बताया कि मिनी लैप नसबंदी तकनीक नव विकसित सुरक्षित और सरल प्रक्रिया है। इस तकनीक से नसबंदी कराना अत्यंत आसान और सुलभ हो गया है। इस प्रक्रिया में जोखिम बहुत कम होता है और मरीज को लंबे समय तक बेहोश रखने की आवश्यकता नहीं पड़ती। उन्होंने बताया कि इस तकनीक की सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि ऑपरेशन के कुछ घंटों बाद ही मरीज को घर भेजा जा सकता है।
मिनी लैप कार्यशाला के नोडल अधिकारी डा. प्रगति द्विवेदी व डा. शाहीन बानो ने बताया कि मिनी लैप नसबंदी में नाभि के पास एक छोटा-सा चीरा लगाकर नसबंदी की जाती है। यह प्रक्रिया अत्यंत प्रभावी और कम जटिलता वाली होती है। ऑपरेशन के बाद मरीजों को चिकित्सकीय परामर्श के अनुसार स्वास्थ्य का विशेष ध्यान रखने की सलाह दी जाती है।
उन्होंने आगे बताया कि परिवार नियोजन कार्यक्रम की सफलता में इस तकनीक की अहम भूमिका है। यह प्रक्रिया उन महिलाओं के लिए विशेष रूप से उपयोगी है जो लंबे समय के लिए सुरक्षित और स्थायी गर्भनिरोध चाहती हैं। इस तरह की कार्यशालाओं के माध्यम से चिकित्सा अधिकारियों को प्रशिक्षित कर सरकार की परिवार नियोजन योजनाओं को मजबूती प्रदान की जा रही है।
इस अवसर पर डा. वैभव कान्ति, डा. नुपूर मित्तल, डा. सोनिया विश्वकर्मा, डा. शालिनी सिंह, डा. अनुराधा यादव, डा. सारिका पाण्डेय, डा. आकांक्षा शर्मा, डा. नमिता दोहरे, डा. शिल्पी श्रीवास्तव सहित कई सीनियर एवं जूनियर रेजिडेंट भी उपस्थित रहे।
कार्यशाला के समापन पर सभी प्रशिक्षार्थियों ने मिनी लैप तकनीक को सीखने के बाद इसे अपने-अपने चिकित्सा केंद्रों में लागू करने का संकल्प लिया। विश्वविद्यालय प्रशासन ने इस प्रशिक्षण कार्यक्रम को सफलतापूर्वक संचालित करने के लिए सभी प्रशिक्षकों और प्रतिभागियों की सराहना की और भविष्य में भी इस तरह की कार्यशालाओं का आयोजन करने की बात कही।