Friday, January 2, 2026
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हमारा इटावा

आजाद हिन्द फौज के शहीद हुये स्वोतत्रता संग्राम सेनानी

स्‍व0 काली चरन पुत्र स्व0  छोटे लाल निवासी ग्राम-भदामई पोस्‍ट - बसरेहर( इटावा ) मृत्‍यq& वि‍वरण उपलब्‍ध नहीं स्‍व0 रघुनाथ सिंह पुत्र स्‍व0...

15 वीं शताव्दी में इटावा

इस शताव्दी में जोनपुर के शासको ओर दिल्ली सिहासन के विभिन्न अभिलाषियो के बीच बराबर संघर्ष होते रहे इटावा जिलो दोनों राज्यों की सीमा...

इटावा में मुस्लिम प्रभाव

मैनपुरी, फरुखाबाद,आगरा तथा एटा वगैरह पडौस के सभी जिलो ने मुस्लिम विजेताओं की पूर्ण आधीनता स्वीकार की ओर उन्हें रहने के लिए स्थान दिया...

१३ वीं और १४ वीं शताव्दी में इटावा

सन् ११९४ ई० में दिल्ली और कन्नौज के हिंदू राज्यों के पतन हो जाने के बाद यह जिला दिल्ली की मुस्लिम शक्तियों के अधीन...

११ वीं ई० १२ वीं शताव्दी में इटावा

१०१८ ई० तक कन्नोज के राठौर वंशी राजा इटावा पर शासन करते रहे थे उसी समय जब महमूद गजनी भारत के बारहवें आक्रमण मैं...

बोलियों का अनूठा जंक्शन है इटावा

इटावा जनपद, उत्तर प्रदेश में अपनी सांस्कृतिक विविधता और बोलियों के अद्भुत संगम के लिए जाना जाता है। ब्रज क्षेत्र के सीमांत पर स्थित...

‘तपोभूमि‍ है इटावा की धरती ’चारो दि‍शाओं में बहती हैं ‘यमुना’

यमुनोत्री से नि‍कलने वाली यमुना मैया का भी उतना महत्‍व शायद ही कि‍सी अन्‍य स्‍थल पर हो जहां से होती हुई ये आगे बढ़ीं...

‘तपोभूमि‍ है इटावा की धरती’ पांडवों ने यहीं बनाई थी ‘महाभारत युद्ध’ की योजना

जनपद इटावा डेढ़ सौ वर्ष पुराना जि‍ला है। वर्तमान में यह कानपुर कमि‍श्‍नरी में शामि‍ल है। पूर्व में यह आगरा एंव इलाहाबाद कमि‍श्‍नरी में...
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